Iran US War: ईरान की अमेरिका को दो टूक चेतावनी, सिविल ठिकानों पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र में मचेगी तबाही.
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है. ईरान की सेना IRGC ने खुली चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना ने उनके सिविल ठिकानों या आम जनता की सुविधाओं पर हमला किया, तो ईरान का जवाबी हमला इस क्षेत्र की सीमाओं के पार तक जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 7 अप्रैल 2026 की शाम तक का अल्टीमेटम दिया है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दे, वरना उसके बिजली घरों और पुलों को तबाह कर दिया जाएगा.
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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के मुख्य कारण क्या हैं?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने साफ किया है कि अब संयम बरतने का समय खत्म हो चुका है. उन्होंने धमकी दी है कि वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के तेल और गैस बुनियादी ढांचे को इतना नुकसान पहुंचाएंगे कि पूरे क्षेत्र में सालों तक ऊर्जा का संकट पैदा हो जाएगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि लाखों ईरानी नागरिक देश की रक्षा के लिए तैयार हैं. वहीं ईरान के अधिकारियों ने युवाओं और खिलाड़ियों से अपील की है कि वे पावर प्लांट के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाकर उनकी सुरक्षा करें क्योंकि सार्वजनिक संपत्तियों पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है.
ताज़ा सैन्य कार्रवाई और क्षेत्र पर इसका असर
| घटना | विवरण |
|---|---|
| IRGC का हमला | ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत अमेरिकी ठिकानों और सऊदी अरब में अमेरिकी कंपनियों के प्लांट पर मिसाइल हमले किए. |
| अमेरिकी स्ट्राइक | अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. |
| सऊदी अरब की स्थिति | खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और कंपनियों के बीच डर का माहौल है, सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी हुई है. |
| परमाणु सुरक्षा | IAEA ने बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. |
| फ्रांस की चेतावनी | फ्रांस ने कहा है कि सिविल ठिकानों पर हमले से पूरे क्षेत्र में एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है. |
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि ईरान ने चेतावनी दी है कि वह तेल और गैस सप्लाई को पूरी तरह ठप कर सकता है. पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस मुद्दे पर जल्द ही मतदान कर सकती है.




