ईरान ने अमेरिका और इजरायल को दिया बड़ा चकमा, करोड़ों की मिसाइलें गिर रही नकली पेंटिंग और गुब्बारों पर
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव में एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स और वायरल फुटेज के मुताबिक, ईरान अपनी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक हथियारों के बजाय बेहद सस्ते और पुराने तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। ईरान जमीन पर पेंटिंग, गुब्बारे और नकली ढांचे (Decoys) लगाकर अमेरिका और इजरायल की सेना को गुमराह कर रहा है, जिससे उनकी महंगी मिसाइलें बेकार टारगेट्स पर बर्बाद हो रही हैं।
👉: Iran ने अरब देशों से मांगी माफी, Donald Trump बोले- अब ये मिडिल ईस्ट का ‘लूजर’ है।
क्या है ईरान का यह ‘नकली’ पैंतरा और कैसे हो रहा इस्तेमाल?
मार्च के पहले हफ्ते में कई ऐसी रिपोर्ट्स आई हैं जो बताती हैं कि ईरान अपने रनवे और सैन्य अड्डों पर 3D पेंटिंग और गुब्बारों का इस्तेमाल कर रहा है। 4 मार्च 2026 को इजरायल ने एक हमला किया था जिसे उन्होंने Mi-17 हेलिकॉप्टर पर सफल स्ट्राइक बताया था। लेकिन स्वतंत्र जानकारों ने फुटेज देखने के बाद कहा कि वहां कोई मलबा नहीं मिला, जिसका मतलब है कि वह सिर्फ जमीन पर बनी एक पेंटिंग थी।
ईरान अब थर्मल पेंट का भी उपयोग कर रहा है। इससे रनवे पर F-14 फाइटर जेट जैसे चित्र बनाए जा रहे हैं जो गर्मी (Heat Signature) छोड़ते हैं। यह गर्मी बिल्कुल असली जहाज जैसी लगती है, जिससे आसमान में उड़ रहे अमेरिका और इजरायल के हाई-टेक ड्रोन और मिसाइलें धोखा खा जाती हैं और खाली जमीन पर हमला कर देती हैं।
करोड़ों की मिसाइल और चंद रुपयों का पेंट, कैसे हो रहा नुकसान?
इस रणनीति का सबसे बड़ा असर आर्थिक तौर पर पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक, इन नकली निशानों और गुब्बारों को बनाने में ईरान का खर्च सिर्फ कुछ डॉलर या कुछ हजार रुपये आता है। वहीं, इन्हें नष्ट करने के लिए अमेरिका और इजरायल जो सटीक गाइडेड बम और क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कर रहे हैं, उनकी कीमत 10 लाख से 20 लाख डॉलर (करोड़ों रुपये) तक होती है।
ईरान का मुख्य मकसद यही है कि दुश्मन अपनी महंगी और कीमती मिसाइलें इन नकली और बेकार ठिकानों पर गिराकर खत्म कर दे। इसे ‘युद्ध की थकान’ (Attrition) की रणनीति कहा जा रहा है, ताकि असली लड़ाई के समय दुश्मन के पास हथियारों की कमी हो जाए। हालांकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि इन चालों से उनके ऑपरेशन पर खास फर्क नहीं पड़ रहा है।





