इराक में तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला, ईरान सीमा के पास मची अफरातफरी, चीनी कंपनी के प्रोजेक्ट को पहुंचाया नुकसान
दक्षिण इराक के मैसान प्रांत में स्थित बज्रकान तेल क्षेत्र पर 4 अप्रैल 2026 को चार ड्रोन विमानों से हमला किया गया। यह क्षेत्र ईरान की सीमा के काफी करीब है और यहां बड़ी मात्रा में तेल उत्पादन होता है। राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी कर्मचारी की जान नहीं गई है। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह हमला किस मकसद से किया गया था।
हमले से कितना नुकसान हुआ और कौन सी कंपनियां जुड़ी हैं?
इस ड्रोन हमले में मुख्य रूप से तेल उत्पादन वाले हिस्सों को निशाना बनाया गया था। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हमले की वजह से कुछ मशीनों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। इस क्षेत्र से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां इस प्रकार हैं:
- बज्रकान तेल क्षेत्र को मुख्य रूप से चीन की मशहूर कंपनी CNOOC चलाती है।
- यहां बेकर ह्यूजेस (Baker Hughes) और श्लंबरगर (Schlumberger) जैसी बड़ी कंपनियां भी काम कर रही हैं।
- जिस समय ड्रोन रिहायशी मलबे पर गिरे, वहां कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था क्योंकि वह हिस्सा फिलहाल खाली था।
- सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है और टेक्निकल टीमें नुकसान का हिसाब लगा रही हैं।
प्रवासियों और तेल क्षेत्र में काम करने वालों पर क्या होगा असर?
इराक और आसपास के खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी तेल और गैस के क्षेत्र में काम करते हैं। इस तरह के ड्रोन हमलों से वहां रहने वाले मजदूरों और इंजीनियरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। हालांकि इस हमले में किसी भी भारतीय या विदेशी कर्मचारी को चोट नहीं आई है, लेकिन तेल कंपनियों ने अब सुरक्षा के नियमों को और सख्त कर दिया है। खाड़ी देशों में काम करने वाले या वहां जाने की योजना बनाने वाले लोगों के लिए अब ऐसी खबरों पर नज़र रखना ज़रूरी हो गया है।
क्षेत्र में तनाव और बढ़ते हमलों की मुख्य वजह
पिछले कुछ हफ्तों से इराक के अलग-अलग तेल क्षेत्रों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अब ऊर्जा के स्रोतों को निशाना बनाया जा रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने भी पहले बयान दिया था कि अगर उनकी आर्थिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचता है, तो वे कड़ा जवाब देंगे। फिलहाल इराक की सेना ने इस इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए नए डिफेंस सिस्टम की मदद ली जा रही है।




