Israel-Iran Conflict: इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने दागीं मिसाइलें, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
27 मार्च 2026 को इज़राइल और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। इज़राइली सेना ने ईरान के परमाणु केंद्रों और बड़े स्टील कारखानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागीं। इज़राइल के Home Front Command ने Negev रेगिस्तान, Dimona, Beersheba और Ashkelon जैसे इलाकों में खतरे के साइरन बजाए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। हालांकि, बाद में स्थिति की समीक्षा के बाद लोगों को सुरक्षित कमरों से बाहर आने की अनुमति दे दी गई है।
इज़राइल ने ईरान में किन ठिकानों को निशाना बनाया?
इज़राइली वायु सेना ने ईरान के भीतर व्यापक हमले किए हैं। सैन्य रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में कई महत्वपूर्ण ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है:
- इज़राइल ने ईरान के Arak भारी पानी संयंत्र और Yazd में यूरेनियम प्रसंस्करण केंद्र पर हमला किया।
- ईरान की दो सबसे बड़ी स्टील कंपनियों, Khuzestan Steel और Mobarakeh Steel को भी निशाना बनाया गया।
- तेहरान में सैन्य उद्योगों, लॉन्च साइटों और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए गए।
- रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा है कि ये हमले अभी और बढ़ेंगे और उन ठिकानों को नष्ट किया जाएगा जो इज़राइल के खिलाफ हथियार बनाने में मदद कर रहे हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया क्या है?
ईरान ने इज़राइल के इन हमलों का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि इन हमलों की भारी कीमत चुकानी होगी। IRGC के ब्रिगेडियर जनरल माजिद मौसवी ने चेतावनी दी है कि उनका बदला साधारण नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना के बड़े प्रभाव देखे जा रहे हैं:
| संस्था/देश | आधिकारिक बयान |
|---|---|
| IRGC (ईरान) | Strait of Hormuz को बंद करने की घोषणा की और जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की धमकी दी। |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान में उनका ऑपरेशन हफ्तों में समाप्त हो जाएगा। |
| जर्मनी | विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने ईरान को अमेरिका के साथ गंभीर बातचीत करने की सलाह दी है। |
| इज़राइल (HFC) | लेबनान की सीमा से हिजबुल्लाह के पीछे हटने के कारण रॉकेट चेतावनी का समय बढ़ाने की योजना है। |
खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है क्योंकि Strait of Hormuz के बंद होने से समुद्री व्यापार और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एयरलाइंस और जहाजों के रूट में बदलाव की संभावना बनी हुई है।




