Israel-Lebanon Meeting: वाशिंगटन में मिले इज़राइल और लेबनान के राजदूत, सीज़फ़ायर और हथियार छोड़ने पर छिड़ी रार
अमेरिका के वाशिंगटन में मंगलवार को इज़राइल और लेबनान के राजदूतों की एक बहुत बड़ी मीटिंग हुई। इस मीटिंग की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने की। यह साल 1993 के बाद पहली बार है जब दोनों देशों के बीच इतनी ऊंचे स्तर पर सीधी बातचीत हुई है, लेकिन दोनों देशों की शर्तें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
मीटिंग में दोनों देशों ने क्या मांगा?
लेबनान की सबसे पहली और मुख्य मांग यह है कि सबसे पहले जंग रुके और सीज़फ़ायर लागू हो। लेबनान चाहता है कि पहले लड़ाई खत्म हो ताकि हालात सामान्य हो सकें। वहीं इज़राइल का कहना है कि वह Hezbollah के साथ सीज़फ़ायर पर बात नहीं करेगा। इज़राइल की शर्त है कि जब तक Hezbollah अपने हथियार नहीं छोड़ता और निशस्त्र नहीं होता, तब तक शांति संभव नहीं है। इज़राइल एक स्थायी शांति समझौते की मांग कर रहा है।
मीटिंग की मुख्य जानकारियां और आंकड़े
इस मीटिंग में कई बड़े अधिकारी शामिल हुए और युद्ध के भयानक आंकड़ों पर भी चर्चा हुई। नीचे दी गई टेबल में पूरी जानकारी दी गई है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मीटिंग की तारीख | 14 अप्रैल 2026 |
| मेजबान | Marco Rubio (अमेरिकी विदेश मंत्री) |
| इज़राइल के प्रतिनिधि | Yechiel Leiter (राजदूत) |
| लेबनान के प्रतिनिधि | Nada Hamadeh Moawad (राजदूत) |
| लेबनान में कुल मौतें | 2,089 लोग |
| विस्थापित लोग | 10 लाख से ज़्यादा |
अमेरिका का इस मामले पर क्या कहना है?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक उनका मकसद इज़राइल की लंबी अवधि की सुरक्षा पक्की करना और लेबनान की संप्रभुता को वापस दिलाना है। अमेरिका का कहना है कि इज़राइल की जंग Hezbollah से है, न कि लेबनान की सरकार से। इसी वजह से अमेरिका चाहता है कि दोनों पड़ोसी देश आपस में बातचीत करें। यह पूरी मीटिंग Hezbollah की हरकतों की वजह से बुलाई गई थी ताकि विवाद को सुलझाया जा सके।




