Israel New Update: इजराइल ने ठुकराया अमेरिका का प्रस्ताव, ईरान के यूरेनियम को लेकर बढ़ी तनातनी
इजराइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की ओर से दिए गए एक अहम प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। वाशिंगटन ने सुझाव दिया था कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंप दिया जाए, जिसे इजराइल ने सिरे से खारिज कर दिया। यह घटनाक्रम 26 मार्च 2026 को सामने आया है, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। इजराइल के इस फैसले से अमेरिका और उसके बीच के कूटनीतिक मतभेद भी उजागर हुए हैं।
🚨: कुवैत में पकड़ा गया Hezbollah से जुड़ा आतंकी सेल, लेबनान सरकार ने जांच में मदद करने का किया वादा।
अमेरिका के प्रस्ताव में शामिल मुख्य शर्तें क्या थीं?
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के सामने एक 15-सूत्रीय योजना रखी थी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए कई सख्त शर्तें शामिल थीं। इजराइल इस प्रस्ताव के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से ईरान पर से प्रतिबंध हटाने की बात से सहमत नहीं है।
| प्रस्ताव की मुख्य बातें | अमेरिका की मांग/ऑफर |
|---|---|
| परमाणु प्रोजेक्ट | ईरान को अपना परमाणु प्रोजेक्ट पूरी तरह बंद करना होगा |
| यूरेनियम संवर्धन | यूरेनियम संवर्धन पर तुरंत रोक लगानी होगी |
| परमाणु ठिकाने | नतान्ज़ और फोर्डो जैसे ठिकानों को नष्ट करना होगा |
| मिसाइल प्रोग्राम | ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर सख्त पाबंदी लगेगी |
| आर्थिक राहत | बदले में अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को हटा देगा |
| ऊर्जा सहायता | नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए सहायता दी जाएगी |
इजराइल और ईरान का इस मामले पर क्या स्टैंड है?
इजराइल के प्रधान मंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिकी विदेश मंत्री Mark Rubio को अपनी ‘रेड लाइन्स’ के बारे में बता दिया है। इजराइल का साफ कहना है कि वह ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता को पूरी तरह खत्म न करता हो। इजरायली मीडिया के अनुसार, इजराइल इस अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन चाहता है और वह प्रतिबंधों में किसी भी ढील के खिलाफ है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका के इस 15-सूत्रीय प्लान को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान ने इन मांगों को अनुचित और बहुत ज्यादा बताया है। ईरान का कहना है कि वह केवल अपनी शर्तों पर ही युद्ध विराम या समझौता करेगा, जिसमें हर्जाना और Strait of Hormuz पर संप्रभुता जैसी मांगें शामिल हैं। इस बीच IAEA ने यह भी बताया कि हमलों के बाद से ईरान के पास मौजूद करीब 400 किलो उच्च संवर्धित यूरेनियम का कोई पता नहीं चल पा रहा है, जो सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और इजराइल के रुख का समर्थन कर रहे हैं।




