बाबा केदारनाथ के धाम जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम की यात्रा को अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में बड़ी कवायद शुरू कर दी गई है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को पेश आने वाली दुश्वारियों को कम करने और कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं, जिसका सीधा लाभ आने वाले समय में तीर्थयात्रियों को मिलेगा।
गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच के सफर को सुगम बनाने के लिए नई सुरंग और वैकल्पिक मार्गों की तैयार हो रही है रूपरेखा
केदारनाथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पड़ाव, गौरीकुंड से सोनप्रयाग के बीच के रास्ते को आसान बनाने के लिए नई सुरंग और वैकल्पिक मार्गों के निर्माण पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यात्रा में लगने वाले समय को कम करना और श्रद्धालुओं को खड़ी चढ़ाई व संकरे रास्तों से मुक्ति दिलाना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भक्त कम समय और कम थकान में बाबा केदार के दरबार तक पहुँच सकेंगे, जिससे बुजुर्ग और बच्चों को विशेष सुविधा होगी।
बारिश और बर्फबारी जैसी प्राकृतिक बाधाओं से मिलेगा छुटकारा, साल के ज्यादा समय तक निर्बाध रूप से चल सकेगी चारधाम यात्रा
वर्तमान में यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती मौसम की अनिश्चितता होती है। भारी बारिश और बर्फबारी के कारण अक्सर रास्ते बंद हो जाते हैं, जिससे हजारों यात्री बीच रास्ते में ही फंस जाते हैं। प्रस्तावित नई सुरंग के निर्माण से मौसम का असर यात्रा पर कम से कम पड़ेगा। सुरंग बन जाने के बाद भूस्खलन और रास्ता बंद होने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी, जिससे साल के अधिक समय तक यात्रा संचालित करना संभव हो सकेगा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय लोगों के लिए भी वरदान साबित होगी यह परियोजना, कनेक्टिविटी सुधारने पर दिया जा रहा है जोर
सड़क सुधार और नई सुरंग की यह परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों के लिए बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं होगी। बेहतर कनेक्टिविटी होने से क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और राहत कार्य तेजी से पहुंच सकेंगे। इसके अलावा, स्थानीय लोगों को भी आवागमन में आसानी होगी, जिससे उनके रोजमर्रा के जीवन और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार का पूरा जोर केदारनाथ जैसे दुर्गम तीर्थस्थल तक सुरक्षित और बाधारहित पहुंच सुनिश्चित करने पर है।
परियोजना के तकनीकी पहलुओं और सर्वे पर चल रहा है तेजी से मंथन, अंतिम मंजूरी मिलते ही शुरू होगा निर्माण कार्य
इस महत्वपूर्ण परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए इसके तकनीकी पहलुओं और जमीनी सर्वे पर तेजी से मंथन जारी है। हर छोटी-बड़ी चुनौती को ध्यान में रखते हुए योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि एक बार अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होते ही केदारनाथ यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा और यह सफर पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक और यादगार बन जाएगा।





