Kuwait News: कुवैत ने इराक को सौंपा हमले का सबूत, एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस पर हुए अटैक में गई थी 2 जवानों की जान
कुवैत और इराक के बीच सीमा पर हुए हमलों के बाद तनाव बढ़ गया है. कुवैत के राजदूत हसन मोहम्मद ज़मान ने 9 मार्च 2026 को बगदाद में इराकी अधिकारियों से मुलाकात कर एक औपचारिक विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने इराक से कुवैत पर हुए हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों के बारे में अहम जानकारी और खुफिया रिपोर्ट सौंपी है. इन हमलों में कुवैत के दो बॉर्डर गार्ड की जान चली गई थी और कई अहम ठिकानों पर भारी नुकसान हुआ था.
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हमले में क्या हुआ था नुकसान?
3 मार्च 2026 को कुवैत के कई अहम बुनियादी ढांचों पर इराक की तरफ से ड्रोन और मिसाइल दागे गए थे. इस हमले ने कुवैत की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर डाला.
- एयरपोर्ट पर हमला: Kuwait International Airport के फ्यूल टैंक को निशाना बनाया गया, जिससे वहां आग लग गई और काफी नुकसान हुआ.
- अमेरिकी बेस: कुवैत में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस Arifjan और Ali Al-Salem पर भी हमले किए गए.
- जवानों की मौत: इस घटना में ड्यूटी पर तैनात दो कुवैती बॉर्डर गार्ड, वारंट ऑफिसर अब्दुल्ला इमाद अल-शर्राह और मेजर फहद अब्दुलअजीज अल-मजमैद की जान चली गई. कुवैत के गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है.
कुवैत ने यूएन नियमों का दिया हवाला
कुवैत ने इस हमले को एक बड़ा अपराध और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है. कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपनी सुरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करने की बात कही है, जो उसे अपनी सीमा और संपत्तियों को बचाने की पूरी आजादी देता है. कुवैत के कार्यवाहक उप विदेश मंत्री अजीज अल-दैहानी ने कहा कि इराक की जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए होना गलत है. उन्होंने इराक सरकार से इन हथियारबंद गुटों को रोकने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की मांग की है.
इराक सरकार का क्या है कहना?
हमले से जुड़े सबूत मिलने के बाद इराक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कासिम अल-अराजी ने स्थिति को ज्यादा बिगड़ने से बचाने की बात कही है. उन्होंने कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है ताकि पूरे क्षेत्र को किसी बड़े युद्ध से बचाया जा सके. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच पहले से ही भारी तनाव चल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इराक में मौजूद कुछ गुट जानबूझकर उन पड़ोसी देशों पर हमले कर रहे हैं जहां विदेशी सेना के ठिकाने मौजूद हैं.





