कुवैत के विदेश मंत्री ने IAEA चीफ से की ज़रूरी बात, क्षेत्रीय तनाव के बीच परमाणु सुरक्षा पर हुई चर्चा
कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह अल-जाबेर अल-सबाह ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी से फोन पर बात की है। इस बातचीत में मिडिल ईस्ट के ताजा हालातों और परमाणु सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई। कुवैत ने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल और ग्लोबल मानकों को बनाए रखने में एजेंसी की भूमिका की तारीफ की है। क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह बातचीत सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या कुवैत में रेडिएशन का कोई खतरा है?
कुवैत के अधिकारियों और नेशनल गार्ड ने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल देश में रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है। मार्च 2026 में जारी की गई रिपोर्ट और जांच के बाद यह पाया गया कि कुवैत में रेडिएशन का स्तर सामान्य बना हुआ है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी पूरी है।
- कुवैत के पास सबसे नज़दीकी परमाणु रिएक्टर 240 किलोमीटर से ज़्यादा दूर स्थित है।
- इतनी दूरी किसी भी संभावित खतरे के प्रभाव को काफी कम कर देती है।
- नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे घबराएं नहीं और केवल सरकारी आदेशों का पालन करें।
- कुवैत अपनी निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए IAEA के साथ मिलकर काम कर रहा है।
- आपात स्थिति के लिए सिविल डिफेंस ने पहले ही गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा पर क्या है ताजा अपडेट?
ईरान और इजरायल के बीच सैन्य टकराव की वजह से परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर दुनिया भर की नज़र है। IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि युद्ध के दौरान परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक हो सकता है। ईरान ने भी अपनी परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर IAEA में विरोध जताया है और सहयोग के नियमों में बदलाव की बात कही है।
| संस्था/देश | ताजा स्थिति और कदम |
|---|---|
| IAEA | रेडिएशन लेवल की लगातार जांच कर रही है |
| कुवैत सरकार | सुरक्षा और सावधानी के निर्देश जारी किए गए हैं |
| ईरान | परमाणु ठिकानों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है |
| प्रवासी भारतीय | सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की सलाह है |
IAEA की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अभी तक किसी भी तरह के खतरनाक परमाणु रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है। कुवैत अपनी समुद्री और वायु सीमा पर रेडिएशन की निगरानी के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए राहत की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सुरक्षा के हर पहलू पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।




