लेबनान और इसराइल के बीच 43 साल बाद पहली बार बात, वॉशिंगटन में राजदूतों के बीच हुआ फोन कॉल, अमेरिका करा रहा मध्यस्थता
लेबनान और इसराइल के बीच करीब 43 साल बाद पहली बार सीधा संपर्क हुआ है। दोनों देशों के वॉशिंगटन स्थित राजदूतों ने एक फोन कॉल के जरिए बातचीत की। यह कदम युद्ध रोकने और शांति समझौते की दिशा में एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है। अमेरिका इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
लेबनान और इसराइल के बीच क्या बात हुई?
10 अप्रैल 2026 को लेबनान की राजदूत Nada Hamadeh Maacoud और इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह 1983 के बाद से दोनों देशों के बीच पहला सीधा संपर्क था। इस बातचीत में अमेरिकी अधिकारी भी शामिल थे। आने वाले मंगलवार को अमेरिकी विदेश विभाग में दोनों पक्षों की पहली आमने-सामने मीटिंग भी होगी, जिसका नेतृत्व अमेरिका करेगा।
बातचीत के मुख्य मुद्दे और शर्तें क्या हैं?
- लेबनान: लेबनान की सरकार बातचीत शुरू करने के लिए पहले युद्धविराम (ceasefire) की मांग कर सकती है।
- इसराइल: प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि बातचीत का मुख्य मकसद Hezbollah का निशस्त्रीकरण (disarming) करना होगा।
- अमेरिका: राष्ट्रपति Donald Trump ने इसराइल को हमलों का दायरा कम करने और बातचीत की तरफ बढ़ने की सलाह दी है।
- Hezbollah: हिजबुल्लाह ने बिना युद्धविराम और इसराइली सेना की वापसी के बिना किसी भी सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है।
क्या युद्ध पूरी तरह रुक गया है?
कूटनीतिक बातचीत के बावजूद जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। Benjamin Netanyahu ने साफ किया है कि अभी कोई युद्धविराम नहीं हुआ है और इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए Hezbollah पर हमले जारी रखेगा। 10 अप्रैल को भी इसराइली सेना ने लेबनान में लगभग 10 लॉन्चरों को निशाना बनाया, क्योंकि वहां से उत्तरी इसराइल की तरफ रॉकेट दागे गए थे।




