Lebanon और Israel के बीच Washington में बातचीत शुरू, अमेरिका बना मध्यस्थ, 1993 के बाद पहली बार आमने-सामने आए दोनों देश
वाशिंगटन में आज लेबनान और इसराइल के प्रतिनिधियों के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही इस बैठक में दोनों देश 1993 के बाद पहली बार उच्च स्तर पर आमने-सामने आए हैं। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और जमीनी संघर्ष जारी है।
बातचीत में कौन शामिल है और क्या है भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया को अमेरिका लीड कर रहा है, जिसमें विदेश मंत्री Marco Rubio मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। बैठक में अमेरिका के राजदूत Michel Issa और Mike Waltz भी मौजूद हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| पक्ष | प्रतिनिधि/नेता | मुख्य भूमिका/उद्देश्य |
|---|---|---|
| अमेरिका | Marco Rubio | मध्यस्थता और सुरक्षा सुनिश्चित करना |
| इसराइल | Yechiel Leiter | Hezbollah को निशस्त्र करना |
| लेबनान | Nada Hamadeh Moawad | संप्रभुता और युद्धविराम प्राप्त करना |
दोनों देशों की मुख्य मांगें और शर्तें
इस बातचीत में दोनों पक्षों के बीच शर्तों को लेकर बड़ा अंतर दिख रहा है। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और सरकारी प्रवक्ता Shosh Bedrosian ने साफ किया है कि उनकी प्राथमिकता Hezbollah को पूरी तरह निशस्त्र करना और उन्हें लेबनान से हटाना है। इसराइल ने स्पष्ट कहा है कि वह बिना disarmament के ceasefire पर बात नहीं करेगा।
दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun और प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने युद्धविराम की मांग की है। लेबनान का मानना है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पहले गोलीबारी रुकनी चाहिए। वहीं, Hezbollah के नेता Naim Qassem ने इन चर्चाओं को बेकार बताया है और कहा है कि वे किसी भी ऐसे समझौते को नहीं मानेंगे जिसमें उनकी सहमति न हो।
जमीनी हालात और मानवीय संकट
यह राजनयिक प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं जब इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी हमला कर रखा है। बीरूत और अन्य शहरों पर भारी बमबारी हुई है, जिसमें अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इस युद्ध की वजह से करीब 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। Bint Jbeil जैसे इलाकों में इसराइली सेना और Hezbollah के बीच अभी भी भीषण झड़पें जारी हैं।




