मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात, भारतीयों को निकालने के लिए PM मोदी से गुहार, 400 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल
मिडिल ईस्ट में चल रहे भारी तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 1 मार्च, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वहां फंसे पंजाबियों और अन्य भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। बादल ने कहा है कि जैसे ही हवाई रास्ते खुलते हैं, एक विशेष एयरलिफ्ट ऑपरेशन शुरू किया जाना चाहिए क्योंकि लोग वहां ‘वॉर ज़ोन’ यानी युद्ध के मैदान में फंस गए हैं।
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युद्ध के कारण क्या है वहां का ताज़ा हाल?
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी और 1 मार्च को हुए इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर है, जिसके बाद ईरान में 40 दिनों का शोक घोषित किया गया है।
सुरक्षा को देखते हुए भारत के DGCA ने भारतीय विमान कंपनियों को ईरान, इज़राइल, लेबनान, UAE और सऊदी अरब समेत 11 देशों के ऊपर से उड़ान न भरने की सलाह दी है। केंद्र सरकार का कहना है कि अभी वहां हालात ‘उथल-पुथल’ वाले हैं, इसलिए तुरंत एयरलिफ्ट करना सुरक्षित नहीं है, लेकिन सरकार लगातार नज़र बनाए हुए है।
फ्लाइट्स और फंसे यात्रियों के लिए क्या हैं नियम?
इस तनाव का सीधा असर आम यात्रियों और वहां रहने वाले कामगारों पर पड़ा है। 1 मार्च को 444 से ज्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट्स कैंसिल होने की उम्मीद है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी कंपनियों ने अपनी उड़ानें रोक दी हैं।
- रिफंड की सुविधा: जिन यात्रियों की फ्लाइट 2 मार्च तक बुक थी, उन्हें एयरलाइन्स पूरा पैसा वापस (Full Refund) या बिना फीस के तारीख बदलने का विकल्प दे रही हैं।
- किराया बढ़ा: जो कुछ रास्ते खुले हैं, वहां किराया बहुत महंगा हो गया है। कोलकाता से दुबई का एक तरफ का किराया 40,000 रुपये तक पहुंच गया है।
- छात्र और परीक्षाएं: ईरान में करीब 1200 भारतीय मेडिकल छात्र फंसे हैं। CBSE ने मिडिल ईस्ट में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं टाल दी हैं।
विदेश मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीयों को घर के अंदर रहने और दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी है।




