Strait of Hormuz News: नाटो चीफ मार्क रूटे ने जहाजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान, दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर जताई चिंता.
नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष के बाद इस समुद्री रास्ते पर आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है। रूटे ने साफ किया कि समुद्री नेविगेशन की आजादी को बहाल करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है और इसके लिए सभी देशों को साथ आना होगा।
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ट्रंप की मांग और नाटो का इस पर क्या है स्टैंड?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए अगले कुछ दिनों में मदद करने की मांग की है। मार्क रूटे ने वाशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात की और ईरान युद्ध से जुड़े तनाव पर चर्चा की। हालांकि नाटो सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं होगा, लेकिन कई सदस्य देश समुद्री रास्ते को फिर से खोलने के लिए लंबी अवधि के समाधान तलाश रहे हैं। जर्मनी जैसे देशों ने कहा है कि नाटो एक रक्षा गठबंधन है और वे अभी किसी सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेंगे।
ईरान का टोल टैक्स और जहाजों की मौजूदा स्थिति
ईरान ने हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से भारी भरकम पैसा वसूलने की बात कही है, जिसे दुनिया के कई देशों ने मानने से इनकार कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक इस रास्ते से गुजरने के लिए कोई देश मनमाना पैसा नहीं वसूल सकता। वर्तमान में स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है क्योंकि सैकड़ों जहाज वहां फंसे हुए हैं।
| विवरण | ताजा जानकारी (9 अप्रैल 2026) |
|---|---|
| फंसे हुए तेल टैंकर | 426 टैंकर अभी भी क्षेत्र में मौजूद हैं |
| ईरान की मांग | प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर तक का टोल |
| बुधवार की आवाजाही | केवल 4 कार्गो जहाज गुजरे, कोई तेल टैंकर नहीं |
| यूरोपीय संघ और UN का रुख | टोल टैक्स के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज किया |
| ओमान का फैसला | किसी भी तरह का ट्रांजिट शुल्क न लेने का समझौता किया |
| कुवैत की अपील | सुरक्षा बहाल करने और ईरान से तनाव खत्म करने को कहा |
गल्फ देशों और प्रवासियों पर इसका क्या होगा असर?
हॉर्मुज के रास्ते में रुकावट आने से खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से होने वाले तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ता है। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है या ईरान टोल वसूलने में कामयाब होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सीधे तौर पर वहां की आर्थिक स्थिति और नौकरियों से जुड़ी हुई है। फिलहाल 22 देशों का एक समूह इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने की कोशिशों में लगा है।




