नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, अब हफ्ते में 2 दिन रहेगी छुट्टी, ईंधन बचाने के लिए बदला ऑफिस का समय.
नेपाल सरकार ने देश में तेल की कमी और बढ़ते ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब सरकारी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों में हफ्ते में 6 दिन के बजाय सिर्फ 5 दिन ही काम होगा। यह नया नियम सोमवार, 6 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और आर्थिक बचत को बढ़ावा देना है।
सरकारी दफ्तरों और स्कूलों के लिए क्या है नया टाइम-टेबल?
नए नियमों के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारियों और छात्रों को हफ्ते में दो दिन की छुट्टी मिलेगी। पहले नेपाल में केवल शनिवार को छुट्टी होती थी, लेकिन अब शनिवार और रविवार दोनों दिन अवकाश रहेगा। सरकार ने काम के घंटों में भी बदलाव किया है जिसे नीचे विस्तार से समझा जा सकता है:
- काम के दिन: सोमवार से शुक्रवार तक ही ऑफिस खुलेंगे।
- नया समय: सरकारी दफ्तर अब सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेंगे।
- पुराना समय: पहले ऑफिस सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुलते थे।
- स्कूलों के लिए नियम: स्कूलों में भी 5 दिन की पढ़ाई होगी, लेकिन उन पर 9 से 5 वाला समय लागू नहीं होगा।
ईंधन संकट और तेल की सप्लाई पर क्या बोले अधिकारी?
सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि पश्चिम एशिया में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से तेल की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई में रुकावट के कारण पूरी दुनिया में तेल के दाम बढ़ रहे हैं। नेपाल पूरी तरह से अपनी तेल जरूरतों के लिए भारत की ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन’ (IOC) पर निर्भर है, इसलिए वहां से सप्लाई में किसी भी बाधा का असर नेपाल पर तुरंत पड़ता है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| फैसले की तारीख | 5 अप्रैल 2026 |
| लागू होने की तारीख | 6 अप्रैल 2026 |
| साप्ताहिक छुट्टी | शनिवार और रविवार |
| मुख्य कारण | वैश्विक ईंधन संकट और युद्ध तनाव |
नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो हालात और खराब हो सकते हैं। इसीलिए सरकार अब पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में बदलने के लिए भी कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देता है, ऐसे में नेपाल को पहले से ही सावधानी बरतनी होगी।




