पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ी पहल की है. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि देश शांति प्रक्रिया के लिए जितने भी दौर की बातचीत चाहिए, उसकी मेजबानी करने को तैयार है. यह कदम दुनिया में शांति बनाए रखने और मौजूदा सीजफायर को बचाने के लिए उठाया गया है.

पाकिस्तान में बातचीत का क्या रहा असर और अब क्या होगा?

पहली दौर की बातचीत 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में खत्म हुई थी. हालांकि इसमें कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन पाकिस्तान के सूत्रों के मुताबिक कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है. अब पाकिस्तान ने सीजफायर खत्म होने से पहले दूसरे दौर की बातचीत की पेशकश की है. रक्षा मंत्री खवाजा आसिफ ने कहा कि बातचीत में अब तक केवल सकारात्मक परिणाम ही दिखे हैं और कोई नकारात्मक घटना नहीं हुई है.

किन मुद्दों पर फंसा है अमेरिका और ईरान का मामला?

दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से छह बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है, जिसकी वजह से पहली बातचीत बिना समझौते के खत्म हुई. ये मुद्दे नीचे दिए गए हैं:

  • यूरैनियम संवर्धन (Uranium enrichment) का विवाद.
  • प्रमुख संवर्धन सुविधाओं को पूरी तरह हटाना.
  • उच्च संवर्धित यूरैनियम के स्टॉक को खत्म करना.
  • क्षेत्रीय सुरक्षा का एक व्यापक ढांचा तैयार करना.
  • आतंकी संगठनों की फंडिंग को पूरी तरह बंद करना.
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना टोल के खोलना.

कौन-कौन से देश और नेता इस पहल का समर्थन कर रहे हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया है. वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी इस बातचीत को जारी रखने की अपील की है ताकि शांति बनी रहे. इस मध्यस्थता का समर्थन चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, तुर्की, जर्मनी, इटली और रोमानिया जैसे कई बड़े देश कर रहे हैं.

Sushma Kumari

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