Hormuz Strait को लेकर रूस और चीन की चेतावनी, तेल की सप्लाई रुकने से मचेगा हाहाकार
रूस और चीन ने Strait of Hormuz को बंद करने की संभावनाओं पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। सोमवार 23 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक बयानों में कहा गया कि इस समुद्री रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहे इस युद्ध को आज 24 दिन पूरे हो चुके हैं और तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
रूस और चीन की आधिकारिक मांग और चेतावनी
रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह Hormuz Strait को बंद करने के किसी भी फैसले के सख्त खिलाफ है। रूस के उप विदेश मंत्री Andrei Rudenko के अनुसार, क्षेत्र में हालात तभी सामान्य होंगे जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाई रुकेगी। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने भी सभी देशों से तुरंत युद्ध रोककर बातचीत शुरू करने को कहा है। चीन को डर है कि अगर युद्ध का दायरा बढ़ा तो पूरा क्षेत्र हिंसा के एक ऐसे चक्र में फंस जाएगा जिससे निकलना मुश्किल होगा।
वैश्विक तेल बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
Hormuz Strait दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार रास्तों में से एक है और इसके बंद होने का मतलब है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा रुक जाएगा। रूस के डिप्टी पीएम Alexander Novak ने इस खतरे के बारे में कुछ अहम आंकड़े दिए हैं:
| महत्वपूर्ण पहलू | विवरण और प्रभाव |
|---|---|
| तेल सप्लाई पर असर | दुनिया के कुल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग एक तिहाई हिस्सा प्रभावित होगा |
| दैनिक तेल संकट | रोजाना कम से कम 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई पर सीधा खतरा मंडरा रहा है |
| अमेरिका का अल्टीमेटम | राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को 48 घंटे में रास्ता खोलने की चेतावनी दी है |
| क्षेत्रीय सुरक्षा | ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा और पानी के सिस्टम को निशाना बनाने की धमकी दी है |
परमाणु केंद्रों पर हमले को बताया खतरनाक
रूस के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने चेतावनी दी है कि ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उनके अनुसार इसके नतीजे ऐसे होंगे जिन्हें कभी सुधारा नहीं जा सकेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है और कई देश युद्ध रोकने के लिए प्रस्ताव ला रहे हैं। सऊदी अरब, बहरीन, कतर और UAE जैसे पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमलों की खबरें आई हैं, जिससे खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।




