Russia-Iran Crisis Update: रूस ने ईरान संकट सुलझाने के लिए बढ़ाया हाथ, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी घोषणा
रूस ने ईरान के साथ जारी विवाद को कम करने के लिए अपनी मदद की पेशकश की है। 2 अप्रैल 2026 को क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर कहा कि वे इस संकट को सुलझाने में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान का तनाव काफी बढ़ गया है और पूरे क्षेत्र में मिसाइल हमलों की खबरें आ रही हैं। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि उनकी मध्यस्थता की पेशकश पहले से ही मेज पर है।
रूस और ईरान के बीच किस तरह का है समझौता?
रूस और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से काफी नजदीकी बढ़ी है। इन दोनों देशों ने 17 जनवरी 2025 को एक बड़े रणनीतिक समझौते पर दस्तखत किए थे, जो 2 अक्टूबर 2025 से पूरी तरह लागू हो चुका है। इस समझौते के तहत रूस और ईरान कई जरूरी क्षेत्रों में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं:
- डिफेंस और मिलिट्री तकनीक में सहयोग बढ़ाया गया है।
- एनर्जी और तेल के व्यापार को लेकर दोनों देश साथ काम कर रहे हैं।
- रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस मुद्दे पर लगातार डिप्लोमैटिक बातचीत कर रहे हैं।
- यह साझेदारी लंबे समय के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
मध्य पूर्व में मौजूदा हालात और आम लोगों पर असर
पिछले 24 घंटों में मध्य पूर्व के हालात काफी ज्यादा खराब हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले और तेज करने का ऐलान किया है। इस तनाव की वजह से समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार पर भी असर पड़ रहा है। सऊदी अरब ने भी 2 अप्रैल को अपनी सीमा के पास दो ड्रोन मार गिराए हैं। इसका असर वहां रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी पड़ सकता है। हालात को देखते हुए इराक ने अपना तेल भेजने के लिए नया रास्ता अपनाया है क्योंकि मुख्य समुद्री मार्ग पर खतरा बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी अब इस मामले में कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।




