रूस ने ईरान को दी इसराइल के बिजली केंद्रों की लिस्ट, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के दावे से मची खलबली.
रूस और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है कि रूस ने ईरान को इसराइल के 50 से ज्यादा महत्वपूर्ण बिजली और ऊर्जा केंद्रों की खुफिया जानकारी दी है। इस खबर के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है क्योंकि ये सभी ठिकाने इसराइल के आम नागरिकों की सुविधाओं से जुड़े हैं।
🗞️: इसराइल को ईरान से जंग पड़ी महंगी, 15 अरब डॉलर का हुआ नुकसान, ट्रंप ने दी ईरान को बड़ी चेतावनी.।
ज़ेलेंस्की के खुलासे में क्या मुख्य बातें सामने आई हैं?
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बताया कि रूस ने सैटेलाइट के जरिए ली गई खुफिया जानकारी ईरान के साथ साझा की है। इसमें इसराइल के करीब 50 से 53 ऐसे ठिकाने शामिल हैं जो वहां के बिजली ग्रिड और नागरिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। ज़ेलेंस्की के अनुसार, रूस अपना वह अनुभव ईरान को दे रहा है जो उसने यूक्रेन के पानी और बिजली सिस्टम को तबाह करने के दौरान हासिल किया है। उनके मुताबिक यह सहयोग उसी तरह का है जैसे ईरान ने पहले रूस को ड्रोन तकनीक दी थी।
इस मामले में अलग-अलग देशों का क्या रुख है?
इस पूरे घटनाक्रम पर रूस और यूक्रेन के बीच बयानों का दौर जारी है। जहां यूक्रेन ने इसे एक बड़ी साजिश बताया है, वहीं रूस ने इन सभी दावों को पूरी तरह से गलत करार दिया है। रूस का कहना है कि वह इस क्षेत्र में शांति चाहता है और युद्ध खत्म करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि कौन सा देश क्या भूमिका निभा रहा है:
| संस्था/देश | महत्वपूर्ण जानकारी और पक्ष |
|---|---|
| Russia | ईरान को सैटेलाइट जानकारी देने का आरोप, हालांकि रूस ने इसे खारिज किया है |
| Iran | आरोप है कि उसे इसराइल के 50 से ज्यादा ऊर्जा केंद्रों की लिस्ट मिली है |
| Israel | इस देश के नागरिक बुनियादी ढांचे और बिजली ग्रिड को निशाना बनाने की बात कही गई |
| Ukraine | राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने पहली बार इस खुफिया जानकारी को सार्वजनिक किया |
| Associated Press | वह न्यूज़ एजेंसी जिसने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का यह इंटरव्यू लिया था |
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले भी कहा है कि वह ईरान और इसराइल के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं। हालांकि यूक्रेन के दावों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि इसराइल अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है क्योंकि ये सभी ठिकाने मिलिट्री के नहीं बल्कि आम जनता के इस्तेमाल के हैं।




