S Jaishankar को ईरान से आया फोन, पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर हुई चर्चा, फंसे हुए भारतीय जहाजों पर भी नजर.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची का फोन आया है। इस महत्वपूर्ण बातचीत में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर लंबी चर्चा हुई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी खींचतान के बीच भारत इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। जयशंकर ने उसी दिन कतर और यूएई के शीर्ष नेताओं से भी बात की ताकि क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की ताजा जानकारी ली जा सके।
इस बातचीत के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति क्या है?
ईरान और भारत के बीच हुई इस चर्चा में क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बात की गई। ईरानी दूतावास के अनुसार अराघची ने वर्तमान हालातों पर ईरान का पक्ष रखा है। इस तनाव का सीधा असर समुद्री रास्तों पर पड़ रहा है, जिस पर भारत के लिए कई जरूरी बातें सामने आई हैं:
- भारत का LPG टैंकर ‘Green Sanvi’ 4 अप्रैल 2026 को सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुका है।
- अब तक भारत के 9 टैंकर सुरक्षित निकल गए हैं, लेकिन 18 जहाज अभी भी वहां फंसे होने की खबर है।
- ईरान ने साफ किया है कि हॉर्मुज का रास्ता उसके दोस्तों के लिए खुला है लेकिन दुश्मनों के लिए बंद रहेगा।
- राहत की बात यह है कि पिछले 72 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है और सभी नाविक सुरक्षित हैं।
अमेरिका की चेतावनी और क्षेत्र में सैन्य हलचल
अमेरिका और ईरान के बीच हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कड़ी चेतावनी जारी की है कि अगर ईरान ने अपनी घेराबंदी नहीं हटाई तो मंगलवार यानी 7 अप्रैल को बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही पिछले 48 घंटों में कई सैन्य घटनाएं भी हुई हैं:
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 4 अप्रैल 2026 | ईरान के पेट्रोकेमिकल हब पर हमले की खबर, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई। |
| 5 अप्रैल 2026 | अमेरिका ने ईरान के अंदर फंसे अपने दो कर्मियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। |
| 6 अप्रैल 2026 | ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास सोमवार तक का समय है वरना मंगलवार को गंभीर नतीजे होंगे। |
भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की वकालत कर रहा है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और वहां से होने वाले तेल-गैस के व्यापार को देखते हुए यह क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कतर और यूएई के नेताओं के साथ भी चर्चा की है ताकि भारतीयों की सुरक्षा और व्यापारिक हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।




