सऊदी अरब ने इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने (नॉर्मलाइजेशन) के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। प्रिंस तुर्की अल-फैसल और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद रियाद अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। विशेष रूप से फिलिस्तीन के मुद्दे पर जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक सऊदी अरब इजरायल के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार नहीं है।
ट्रंप के साथ बैठक में क्राउन प्रिंस का स्पष्ट संदेश
नवंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी स्थिति को बहुत स्पष्टता से रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से कहा कि सऊदी अरब ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल होने की आकांक्षा रखता है, लेकिन इसके लिए एक अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का एक स्पष्ट रास्ता मौजूद हो।” निजी तौर पर यह भी बताया गया है कि ट्रंप ने नॉर्मलाइजेशन के लिए जोर दिया था, लेकिन क्राउन प्रिंस ने साफ कर दिया कि सऊदी समाज फिलहाल ऐसे किसी कदम को स्वीकार नहीं करेगा।
प्रिंस तुर्की अल-फैसल का बयान: शर्तें पूरी होने तक कोई समझौता नहीं
सऊदी खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ राजनेता प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने देश की स्थिति को अटूट बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “सऊदी अरब इजरायल के साथ सामान्यीकरण समझौते पर विचार नहीं कर रहा है। यदि इजरायल एक सामान्य देश बन जाता है और अंतरराष्ट्रीय कानून को स्वीकार करता है, तभी सऊदी अरब इस पर विचार करेगा।” उनका यह बयान दर्शाता है कि सऊदी नेतृत्व इस मुद्दे पर किसी भी जल्दबाजी में नहीं है और अपने पुराने कूटनीतिक रुख पर कायम है।
फिलिस्तीन का मुद्दा और इजरायली आक्रामकता
संबंधों को सामान्य करने की सबसे बड़ी शर्त फिलिस्तीनी मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान है। प्रिंस तुर्की ने जोर देकर कहा कि इजरायल के साथ संबंध तभी सुधर सकते हैं जब फिलिस्तीन के लिए एक निष्पक्ष और अंतिम समाधान तक पहुंचा जाए। उन्होंने क्षेत्र में इजरायल के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि गाजा, वेस्ट बैंक, सीरिया और लेबनान में इजरायल की आक्रामक कार्रवाई ने विश्वास के माहौल को खत्म कर दिया है, जिससे आगे का रास्ता और भी कठिन हो गया है।
अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग और एफ-35 डील
एक दिलचस्प कूटनीतिक रणनीति के तहत, क्राउन प्रिंस ने अमेरिका के साथ सऊदी अरब के रणनीतिक सहयोग को इजरायल के साथ रिश्तों से प्रभावी रूप से अलग कर दिया है। विश्लेषण बताते हैं कि सऊदी अरब अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमानों सहित कई महत्वपूर्ण सुरक्षा रियायतें हासिल कर रहा है। इसके बदले में, वे इजरायल के साथ संबंधों को केवल एक “दूर की संभावना” के रूप में पेश कर रहे हैं और कूटनीतिक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन तत्काल किसी समझौते का वादा नहीं कर रहे हैं।
प्रमुख बयानों का विवरण
सऊदी अरब के रुख को समझने के लिए प्रमुख नेताओं के बयानों और रिपोर्ट्स का सारांश नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| व्यक्ति/स्रोत | मुख्य बयान/रुख |
|---|---|
| क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान | अब्राहम समझौते में शामिल होने की इच्छा, लेकिन फिलिस्तीन के लिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ का स्पष्ट रास्ता अनिवार्य बताया। |
| प्रिंस तुर्की अल-फैसल | इजरायल जब तक अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन नहीं करता और फिलिस्तीन मुद्दा हल नहीं होता, तब तक कोई समझौता नहीं। |
| निजी विश्लेषण/रिपोर्ट्स | सऊदी समाज फिलहाल इजरायल के साथ रिश्तों के लिए तैयार नहीं है, यह बात ट्रंप प्रशासन को बताई गई। |
Last Updated: 17 January 2026





