यमन के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब साउदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल (STC) के प्रमुख एदरूस अल-ज़ुबैदी (Aidaroos al-Zubaidi) के यमन से भागने की खबर सामने आई। यमन के तटीय शहर आदेन से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी तक का यह सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। अल-ज़ुबैदी ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए करीब 18 घंटे का लंबा और जोखिम भरा सफर तय किया, जिसमें समुद्री रास्ते और गुप्त हवाई उड़ान का सहारा लिया गया।
आधी रात को आदेन पोर्ट से नाव के जरिए सोमालिया और वहां से ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर अबू धाबी पहुंचने का 18 घंटे का पूरा रूट
इस ‘भागने के सफर’ की शुरुआत 6 जनवरी की आधी रात को हुई। अल-ज़ुबैदी आदेन पोर्ट से एक नाव के जरिए समुद्र के रास्ते सोमालीलैंड के बर्बेरा पोर्ट के लिए रवाना हुए। बर्बेरा पहुंचने के बाद, वहां से उन्होंने सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के लिए उड़ान भरी। यह पूरा ऑपरेशन बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। मोगादिशु से उन्होंने Ilyushin Il-76 विमान के जरिए उड़ान भरी। यह विमान यूएई के अधिकारियों की निगरानी में था। सफर के दौरान गोपनीयता बनाए रखने के लिए गल्फ ऑफ ओमान के ऊपर से गुजरते समय विमान का ट्रांसपोंडर (ट्रैकिंग सिस्टम) जानबूझकर बंद कर दिया गया था, ताकि किसी को उसकी लोकेशन का पता न चल सके। मोगादिशु में करीब एक घंटे रुकने के बाद, विमान सीधे अबू धाबी के अल रीफ मिलिट्री एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।
राजद्रोह के गंभीर आरोपों और गिरफ्तारी के वारंट के बीच रियाद में शांति वार्ता के लिए बुलावे को ठुकराकर भागने का फैसला
अल-ज़ुबैदी के इस तरह देश छोड़कर भागने के पीछे की मुख्य वजह यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) द्वारा उन पर की गई कार्रवाई है। पीएलसी चेयरमैन रशद अल-अलीमी ने अल-ज़ुबैदी को ‘हाई ट्रीज़न’ (देशद्रोह) के आरोपों में पद से हटा दिया था और उन्हें जनरल प्रॉसीक्यूटर को सौंपने का आदेश जारी किया था। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में एसटीसी द्वारा सऊदी अरब की सीमा से सटे हदरामौत और महरा जैसे इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश ने तनाव को और बढ़ा दिया था। सऊदी अरब ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना और मुकल्ला पोर्ट पर एयरस्ट्राइक भी की थीं। 7 जनवरी को अल-ज़ुबैदी को रियाद में शांति वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे अपने डेलिगेशन के साथ फ्लाइट में नहीं चढ़े और इसके बजाय गुप्त रास्ते से निकल गए।
सऊदी गठबंधन और यूएई के बीच बढ़ता तनाव और सोमालिया सरकार द्वारा एयरस्पेस के इस्तेमाल पर जांच के आदेश
इस घटना ने यमन में सक्रिय दो प्रमुख शक्तियों—सऊदी अरब और यूएई—के बीच के गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। जहां सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है, वहीं यूएई पर एसटीसी के विद्रोहियों को बैकअप देने के आरोप लगते रहे हैं। सऊदी गठबंधन ने आरोप लगाया है कि एक यूएई मेजर जनरल और अन्य अधिकारियों ने अल-ज़ुबैदी को देश से बाहर निकालने (smuggle) में मदद की। हालांकि, एसटीसी ने इन खबरों का खंडन करते हुए दावा किया था कि उनके नेता आदेन में ही हैं और सऊदी एयरस्ट्राइक को अन्यायपूर्ण बताया। इस बीच, सोमालिया सरकार ने अपने एयरस्पेस और सोमालीलैंड के रूट के इस्तेमाल को लेकर जांच शुरू कर दी है, जिससे कूटनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ गई है।





