Strait of Hormuz: अमेरिका की नाकाबंदी पर European Council ने जताया विरोध, कहा इससे समस्या हल नहीं होगी
अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को Strait of Hormuz में ईरान से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। इस बड़े कदम पर European Council ने अपनी आपत्ति जताई है। यूरोपीय संघ का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई जलमार्ग की बंदी की समस्या का सही समाधान नहीं है। इस तनाव से पूरी दुनिया की नज़रें अब इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर टिकी हैं।
यूरोपीय देशों ने अमेरिका के फैसले को क्यों नकारा?
यूरोप के कई बड़े देश अमेरिका की इस रणनीति से सहमत नहीं हैं। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। विभिन्न देशों के रुख की जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| देश | मुख्य बयान/रुख |
|---|---|
| ब्रिटेन | प्रधानमंत्री Keir Starmer ने नाकाबंदी का समर्थन नहीं किया और कहा कि ब्रिटेन युद्ध में नहीं घिसेगा। |
| फ्रांस | राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने कहा कि बल प्रयोग से समाधान नहीं निकलेगा, वे शांतिपूर्ण मिशन चाहते हैं। |
| इटली | इटली ने कहा कि किसी भी कार्रवाई के लिए UN का आदेश होना जरूरी है और राजनयिक बातचीत होनी चाहिए। |
| स्पेन | स्पेन के रक्षा मंत्री ने अमेरिकी नाकाबंदी को पूरी तरह बेकार बताया। |
ईरान की चेतावनी और सऊदी अरब का स्टैंड क्या है?
ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई को गैर-कानूनी करार देते हुए इसे समुद्री डकैती कहा है। ईरान के रक्षा प्रवक्ता Gen. Reza Talaei-Nik ने 14 अप्रैल को चेतावनी दी कि विदेशी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बंदरगाहों की सुरक्षा को खतरा हुआ तो क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने इस मामले में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। सऊदी अरब ने पहले ही इस बात पर जोर दिया था कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए Strait of Hormuz का खुला रहना बहुत जरूरी है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन वह बातचीत विफल रही।
आम जनता और ऊर्जा कीमतों पर क्या होगा असर?
इस विवाद की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। European Commission अब सदस्य देशों के साथ चर्चा कर रहा है ताकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के आर्थिक असर को कम किया जा सके।
- अमेरिकी नाकाबंदी का मुख्य लक्ष्य ईरान के तेल निर्यात से जुड़े जहाजों को रोकना है।
- 14 अप्रैल को कुछ जहाजों को इस रास्ते से गुजरते हुए देखा गया है।
- ब्रिटेन और फ्रांस इस हफ्ते समुद्री सुरक्षा पर एक विशेष बैठक करने वाले हैं।





