Strait of Hormuz खोलने के लिए अमेरिका कर रहा ज़मीनी हमले की तैयारी, इजरायल देगा खुफिया साथ, ईरान को मिली चेतावनी
Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए अमेरिका अब बड़ी सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है। इजरायल की खुफिया एजेंसियां इस मिशन में अमेरिका की पूरी मदद कर रही हैं। राष्ट्रपति Donald Trump और विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ यह ऑपरेशन अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनका देश अमेरिका को खुफिया जानकारी और अन्य साधनों से सहायता प्रदान कर रहा है।
अमेरिका और इजरायल की क्या है मुख्य योजना?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी Pentagon ईरान के खिलाफ ज़मीनी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। इस ऑपरेशन में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। योजना की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- Pentagon ईरान के Kharg Island और तटीय इलाकों में ज़मीनी छापेमारी करने की तैयारी में है।
- इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनका देश खुफिया जानकारी साझा करके अमेरिका के प्रयासों में सहयोग कर रहा है।
- अमेरिका का मुख्य लक्ष्य Strait of Hormuz पर ईरान के नियंत्रण को खत्म करना और व्यापारिक रास्ता बहाल करना है।
- Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने रास्ता नहीं खोला तो उसके तेल, बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे पर हमला किया जाएगा।
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अब तक क्या हुआ?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं जो इस पूरे विवाद की गंभीरता को दर्शाती हैं। इन घटनाओं का असर वैश्विक व्यापार और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है:
| महत्वपूर्ण घटना | विवरण |
|---|---|
| ईरान की प्रतिक्रिया | ईरान ने कहा है कि वह किसी भी ज़मीनी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। |
| चीन के जहाज | 30 मार्च को चीन के दो जहाज पहली बार सफलतापूर्वक इस रास्ते से गुजरे हैं। |
| समय सीमा | अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह अगले कुछ हफ्तों में अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा। |
| Pentagon की तैयारी | अमेरिकी सेना कई हफ्तों तक चलने वाले ज़मीनी ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार कर चुकी है। |
आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा असर?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां से होने वाले तेल के निर्यात के लिए यह रास्ता बेहद जरूरी है। अगर इस इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और समुद्री रास्ते से आने वाले सामानों पर पड़ेगा। फिलहाल राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य हलचल काफी बढ़ गई है। खाड़ी में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा के लिहाज से यह एक संवेदनशील समय है।




