फ्लाइट टिकट के दाम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, त्योहारों में मनमाने किराये पर लगेगा लगाम
सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों के दौरान फ्लाइट टिकट के दाम में अचानक होने वाली भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे आम यात्रियों का ‘शोषण’ करार दिया है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह एयरलाइंस की इस मनमानी को रोकने के लिए कड़े नियम बनाने पर विचार कर रही है, ताकि त्योहारों के समय घर जाने वाले लोगों की जेब पर डाका न डाला जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि त्योहारों के समय किराया बढ़ाना एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है ताकि वह एफिडेविट दाखिल करके बताए कि इस रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 23 मार्च 2026 को तय की गई है।
किन रूटों पर सबसे ज्यादा असर?
याचिका में बताया गया है कि होली, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान हवाई किराया तीन से चार गुना तक बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जो बड़े शहरों से अपने घर लौटते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य दिनों में जो टिकट 5,000 रुपये का होता है, वह पीक सीजन में 30,000 रुपये तक पहुँच जाता है।
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले रूटों में ये शामिल हैं:
- दिल्ली से पटना
- मुंबई से पटना
- दिल्ली से जयपुर
- बंगलौर से लखनऊ
सरकार किन नियमों पर कर रही विचार?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने कोर्ट को बताया है कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यात्रियों को राहत देने के लिए सरकार और कोर्ट के बीच इन बिन्दुओं पर चर्चा हो रही है:
- प्राइस कैपिंग: त्योहारों के दौरान ‘सर्ज़ प्राइसिंग’ यानी मांग बढ़ने पर किराया बढ़ाने की सीमा तय की जा सकती है।
- बैगेज और रिफंड: टिकट कैंसल करने और सामान के वजन (Baggage) को लेकर एयरलाइंस की मनमानी पर रोक लग सकती है।
- रेगुलेटर की मांग: हवाई किराये की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने की मांग भी की गई है।




