अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए वहां की सरकार द्वारा अपनाए जा रहे दमनकारी रवैये के जवाब में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रपति को एक उच्च-स्तरीय ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें ईरान के भीतर हवाई हमलों की विस्तृत योजना शामिल है। व्हाइट हाउस की नजर तेहरान के गैर-सैन्य स्थानों के साथ-साथ सामरिक ठिकानों पर भी है।
ईरानी परमाणु ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के केंद्रों को निशाना बनाने की तैयारी, लेकिन जमीनी फौज भेजने का कोई इरादा नहीं
राष्ट्रपति ट्रंप को जो सैन्य विकल्प बताए गए हैं, वे काफी हद तक जून 2025 में फोर्डो, नतांज और इस्फहान के परमाणु स्थलों पर हुए हमलों की याद दिलाते हैं। प्रशासन की योजना के तहत ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के कमांड सेंटरों और वहां की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense) पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जा सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी रणनीति में स्पष्ट किया गया है कि ईरान की धरती पर अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं उतारे जाएंगे, बल्कि पूरी कार्रवाई हवाई हमलों तक ही सीमित रहेगी। अधिकारियों ने यह भी बताया है कि ये योजनाएं फिलहाल रूटीन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और तत्काल हमले का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन तैयारी पूरी है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे ईरान में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के बाद ट्रंप की खुली चेतावनी- ‘अगर आप गोली चलाएंगे, तो हम भी चलाएंगे’
ईरान दिसंबर 2025 से ही भारी आंतरिक कलह और विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। खराब आर्थिक हालात और सत्तावादी शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे आम नागरिकों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 78 लोगों की मौत हो चुकी है और 2600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन हालातों पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सख्त संदेश जारी किया है। उन्होंने लिखा, “ईरान स्वतंत्रता की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है!” इसके साथ ही उन्होंने ईरानी प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई, तो अमेरिका भी जवाब में गोली चलाने से पीछे नहीं हटेगा।
इजरायल के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री की बातचीत और अयातुल्ला खामेनेई की धमकियों के बीच क्षेत्र में तनाव चरम पर
इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच कूटनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने पीछे हटने के बजाय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन जारी रखने की धमकी दी है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के इन बयानों ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।




