जून के महीने में इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इस हमले के बाद से कतर, कुवैत और यूएई के पानी में जहरीले पदार्थ आ गए हैं, ऐसे में इन देशों के पीने के जहरीले होने की आशंका बढ़ गई है। कतर ने इस मामले को लेकर गंभीर चिंता जतायी है। गौरतलब है कि कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ओमान जैसे देशों के लिए समुद्र का पानी ही मुख्य स्त्रोत है। वहीं ईरान का कहना है कि मिसाइल और बमबारी की वजह से देश के पानी और हवा में जहरीले पदार्थ फैल गए हैं।

कुवैत, ओमान और सऊदी अरब समुद्र के पानी पर निर्भर

ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस (GWI) के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक वर्तमान में दुनिया के 5 में से लगभग 4 देश समुद्र के पानी को साफ करके पीने और अन्य कामों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया को विलवणीकरण कहा जाता हैं, जिसमें समुद्र के पानी से नमक हटाकर साफ पानी बनाया जाता है। कुवैत, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों में कुल पानी का 80% से ज्यादा हिस्सा समुद्र के पानी को साफ करके ही प्राप्त होता है।

इजरायली हमले से ईरान को बड़ा नुकसान

ईरान ने बताया कि इजराइली हमले के कारण  तेहरान समेत कई शहरों में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। हमले से केवल तेहरान में ही 1.5 लाख टन मलबा जमा हो गया, जिसे हटाने में 8.7 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ। वहीं फैक्ट्री और सैन्य इलाकों से निकले कचरे को हटाने में भी 3.5 मिलियन डॉलर का खर्च आया है। रे और कान इलाकों में तेल स्टोरेज पर हमला हुआ जिससे 1.95 करोड़ लीटर तेल बर्बाद हो गया। इसके साथ ही 47,000 टन ग्रीनहाउस गैस और करीब 5.8 लाख किलो जहरीली गैसें हवा में फैल गईं जिसकी वजह से कई इलाकों की हवा बहुत ही खराब हो गई है।