UAE सरकार का बड़ा फैसला, अब इमाम और मुफ्ती भी सीखेंगे AI, 5000 लोगों को दी जाएगी ट्रेनिंग
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में धार्मिक मामलों को देखने वाले विभाग ने एक नया और आधुनिक कदम उठाया है। 11 मार्च 2026 को ‘जनरल अथॉरिटी ऑफ इस्लामिक अफेयर्स’ (Awqaf) और ‘UAE AI ऑफिस’ ने मिलकर धार्मिक नेताओं के लिए पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रेनिंग वर्कशॉप शुरू की है। इस खास प्रोग्राम के तहत मस्जिदों के इमाम, मुफ्ती और अन्य धार्मिक वक्ताओं को AI की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में क्या खास है
इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य 5,000 से ज्यादा इमाम और मुफ्ती को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना है। पहली वर्कशॉप मोहम्मद बिन जायद यूनिवर्सिटी (MBZUH) में रखी गई, जिसमें 600 से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से हिस्सा लिया। इस काम में दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां अपना पूरा सपोर्ट दे रही हैं। इन सभी का मकसद धार्मिक संदेशों को आम लोगों तक ज्यादा सही और नए तरीके से पहुंचाना है। इस प्रोग्राम में Microsoft, Google, Cisco, Oracle और Meta जैसी बड़ी कंपनियों ने साझेदारी की है।
AI से इमाम और मुफ्ती कैसे करेंगे काम
इस ट्रेनिंग में धार्मिक विद्वानों को सिखाया जाएगा कि वे कैसे आधुनिक AI टूल्स का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के काम में कर सकते हैं। इसके लिए कई अहम चीजों पर फोकस किया गया है।
- Microsoft Copilot का उपयोग: इसके जरिए धार्मिक भाषण, कंटेंट और रिसर्च का काम आसानी से किया जा सकेगा।
- नैतिकता और जिम्मेदारी: AI का सही और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा ताकि धार्मिक मूल्यों को ठेस न पहुंचे।
- नई तकनीक की समझ: इसके तहत बेसिक AI नॉलेज दी जाएगी, ताकि वे डिजिटल दौर से जुड़ सकें।
- UAE AI Strategy 2031: यह प्रोग्राम देश के विजन 2031 का एक अहम हिस्सा है जो संस्थानों को भविष्य के लिए तैयार करेगा।
अधिकारियों का इस नई पहल पर क्या कहना है
UAE के AI राज्य मंत्री ओमर सुल्तान अल ओलामा ने बताया कि यह कदम भविष्य की तकनीक में सरकार के निवेश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी संस्थाओं को भविष्य के अनुसार ढलने में मदद मिलेगी। वहीं Awqaf के चेयरमैन डॉ ओमर हबतूर अल दारेई ने कहा कि यह पहल धार्मिक नेताओं को लगातार नया सीखने का मौका देगी। इसके जरिए वे AI के फायदों और उससे जुड़ी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। यह कदम UAE के समाज में तकनीक और परंपरा के बीच एक अच्छा तालमेल बनाने का काम करेगा।




