संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने कारोबारी माहौल को और ज्यादा लचीला और निवेश के अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वहां के वाणिज्यिक कंपनी कानून (Commercial Company Law) में कुछ बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इन अपडेट्स का सीधा मकसद यह है कि चाहे कोई स्टार्टअप हो या कोई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी, सभी के लिए यूएई में काम करना आसान हो सके। 2025 के नए संघीय डिक्री-कानून के तहत लागू किए गए ये संशोधन पुराने नियमों को आज के जमाने के हिसाब से ढालते हैं और कंपनियों के कामकाज, मालिकाना हक और विस्तार के तरीकों को पहले से कहीं ज्यादा सरल बनाते हैं।
बिना कंपनी बंद किए बदल सकेंगे लोकेशन
इन नए नियमों में कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अब कंपनियां अपनी लोकेशन बहुत आसानी से बदल सकेंगी। नए कानून के तहत, कंपनियां एक अमीरात से दूसरे अमीरात में, या फ्री ज़ोन से मेनलैंड में अपना रजिस्ट्रेशन शिफ्ट कर सकती हैं। खास बात यह है कि ऐसा करने के लिए उन्हें अपनी कंपनी को बंद (Liquidation) करके दोबारा शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शिफ्टिंग के दौरान कंपनी की कानूनी पहचान, उसके पुराने कॉन्ट्रैक्ट और जिम्मेदारियां सुरक्षित रहेंगी। पहले लोकेशन बदलने का मतलब होता था पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करना, लेकिन अब यह बाधा हटा दी गई है।

शेयर और मालिकाना हक में ज्यादा आज़ादी
नए कानून में कंपनियों के स्ट्रक्चर को लेकर भी काफी ढील दी गई है। अब लिमिटेड लायबिलिटी कंपनियों (LLC) और पब्लिक-प्राइवेट ज्वाइंट स्टॉक कंपनियों को अलग-अलग तरह के (Multiple Classes) शेयर जारी करने का अधिकार मिल गया है। इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से वोटिंग राइट्स और मुनाफे के बंटवारे को तय कर सकेंगी। इसके अलावा, कानून में छोटे शेयरधारकों (Minority Shareholders) के हितों की रक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
फंडिंग जुटाना हुआ आसान
कंपनियों को पैसा जुटाने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिले, इसके लिए भी नियमों में बदलाव किए गए हैं। प्राइवेट ज्वाइंट स्टॉक कंपनियों के लिए ‘लॉक-अप पीरियड’ (वह समय जब तक शेयर बेचे नहीं जा सकते) को दो साल से घटाकर एक साल कर दिया गया है। इससे निवेशकों को अपनी पूंजी को लेकर ज्यादा लचीलापन मिलेगा। साथ ही, एसेट वैल्यूएशन यानी संपत्ति के मूल्यांकन के लिए नए मानक तय किए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
नॉन-प्रॉफिट कंपनियों की नई शुरुआत
इस नए कानून में एक बहुत ही आधुनिक कॉन्सेप्ट पेश किया गया है— ‘नॉन-प्रॉफिट कमर्शियल कंपनी’। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कंपनियां मुनाफा तो कमाएंगी, लेकिन उस मुनाफे को शेयरधारकों की जेब में डालने के बजाय समाज सेवा, शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन जैसे कामों में वापस निवेश किया जाएगा। यह सामाजिक विकास के लिए एक बेहतरीन पहल मानी जा रही है।
तेजी से बढ़ रहा है यूएई का बिजनेस ग्राफ
इन सुधारों का असर आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। 2025 के अंत तक पूरे यूएई में 14 लाख से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर हो चुकी थीं और अकेले 2025 में ही करीब 2.5 लाख नई कंपनियां शुरू हुईं। सबसे अच्छी बात यह है कि अब यूएई की जीडीपी में तेल के अलावा अन्य सेक्टर्स का योगदान 77% से ज्यादा हो गया है। ये नए नियम यह साबित करते हैं कि यूएई भविष्य की ओर देख रहा है और दुनिया भर के निवेशकों के लिए अपने दरवाजे और चौड़े कर रहा है।





