UAE का बड़ा ऐलान, अमेरिका के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को सुरक्षा देगा खाड़ी देश
UAE ने अब आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका की अगुवाई वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने को तैयार है। राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने बताया कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा करना पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है। पिछले कुछ समय से ईरान की गतिविधियों और पाबंदियों की वजह से इस रणनीतिक रास्ते पर जहाजों का आवागमन काफी प्रभावित हुआ है।
UAE इस अभियान में क्यों शामिल होना चाहता है?
अनवर गरगाश के अनुसार, ईरान की मौजूदा रणनीति की वजह से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इसराइल का प्रभाव बढ़ रहा है। UAE चाहता है कि इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने के लिए केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के देश भी साथ आएं। फिलहाल इस रास्ते की सुरक्षा को लेकर कोई औपचारिक योजना पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी माना जा रहा है। UAE का विदेश मंत्रालय भी मानता है कि जहाजों के आने-जाने की आजादी को हर हाल में बरकरार रखा जाना चाहिए।
ईरान और समुद्र की ताजा स्थिति क्या है?
5 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री रास्ते पर तनाव काफी बढ़ गया है। हाल ही में ईरान की नौसेना ने इसराइल से जुड़े एक जहाज MSC Ishika पर ड्रोन से हमला करने का दावा किया था। अभी स्थिति यह है कि 1 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और करीब 1,900 जहाज वहां फंसे हुए हैं। UAE सरकार अब इस संकट को सुलझाने के लिए माइन-क्लियरिंग यानी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने जैसे सैन्य कार्यों में मदद करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।
क्षेत्र में हुए हालिया बड़े घटनाक्रम
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| फंसे हुए जहाज | लगभग 1,900 जहाज फिलहाल समुद्र में फंसे हुए हैं |
| ईरानी हमला | 4 अप्रैल को MSC Ishika जहाज पर ड्रोन हमले का दावा किया गया |
| भारत का रुख | भारत ने 2019 के बाद पहली बार ईरान से तेल खरीदना शुरू किया है |
| UAE की भूमिका | UAE सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है |
इस पूरे मामले का असर उन प्रवासियों और भारतीयों पर भी पड़ सकता है जो खाड़ी देशों में रहते हैं या वहां व्यापार करते हैं। समुद्री रास्ता बंद होने से सामानों की सप्लाई और तेल की कीमतों पर असर पड़ता है, जिससे आम आदमी का खर्चा बढ़ सकता है। ओमान और ईरान भी इस रास्ते को मानवीय उद्देश्यों के लिए खोलने पर बातचीत कर रहे हैं, ताकि फंसे हुए जहाजों और जरूरी सामानों को रास्ता मिल सके।




