UAE Visa Fine: वीज़ा लेट होने पर कौन भरेगा जुर्माना, कंपनी या वर्कर? जानिए क्या कहता है कानून
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में काम करने वाले प्रवासी कामगारों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि अगर उनका वीज़ा समय पर रिन्यू नहीं हुआ तो जुर्माना किसे भरना होगा। कई मामलों में देखा गया है कि कंपनी की तरफ से प्रोसेस में देरी होने के कारण वर्कर्स पर ओवरस्टे का फाइन लग जाता है। UAE के लेबर लॉ के अनुसार, वीज़ा और वर्क परमिट से जुड़े खर्चों और जिम्मेदारियों को लेकर नियम काफी सख्त और स्पष्ट हैं।
जुर्माना भरने की जिम्मेदारी किसकी होती है?
UAE के फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 33 (2021) के तहत, कर्मचारी को नौकरी पर रखने और उसके रेजीडेंसी वीज़ा का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी एंप्लॉयर यानी कंपनी की होती है। अगर कंपनी की लापरवाही, डॉक्यूमेंट जमा करने में देरी या किसी प्रशासनिक कारण से वीज़ा रिन्यू नहीं हो पाता है, तो ओवरस्टे का जुर्माना भी कंपनी को ही भरना पड़ता है।
हालांकि, अगर कर्मचारी ने बार-बार मांगने पर भी अपने जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे पासपोर्ट या फोटो समय पर नहीं दिए, तो जिम्मेदारी कर्मचारी पर आ सकती है। लेकिन सामान्य तौर पर, लेबर कोर्ट और MoHRE में यह साबित करने की जिम्मेदारी कंपनी की होती है कि गलती उनकी नहीं थी।
कितना लगता है फाइन और नए नियम क्या हैं?
अगर वीज़ा का समय खत्म हो जाता है, तो स्टैंडर्ड ओवरस्टे फाइन 50 AED (दिरहम) प्रति दिन है। यह नियम टूरिस्ट, विजिट और रेजीडेंस सभी तरह के वीज़ा पर लागू होता है। इसके अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण नियम भी हैं:
- वर्क परमिट एक्सपायर होने के 60 दिनों के भीतर रिन्यू नहीं करने पर कंपनी को 200 AED प्रति महीने का जुर्माना देना होता है।
- नए नियमों के तहत, अगर किसी व्यक्ति पर ट्रैफिक फाइन (Traffic Fines) बकाया है, तो वीज़ा रिन्यूअल या कैंसलेशन से पहले उसे चुकाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- बिना परमिट काम कराने वाली कंपनियों पर अब 1 लाख से 10 लाख दिरहम तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।




