US Army का बड़ा एक्शन: ईरान के अंडरग्राउंड ठिकाने पर गिराए भारी बम, होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरा हुआ कम
अमेरिकी सेना ने 21 मार्च 2026 को एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की जानकारी साझा की है। सेना के अनुसार, ईरान के एक महत्वपूर्ण भूमिगत ठिकाने पर बमबारी की गई है, जिससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पैदा होने वाला खतरा काफी कम हो गया है। इस हमले में अमेरिकी और इजरायली सेना ने मिलकर ईरान के कई रणनीतिक और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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अमेरिकी सेना ने ईरान के किन ठिकानों को निशाना बनाया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सेना ने ईरान के तटीय इलाके में स्थित एक भूमिगत सुविधा पर 5,000 पाउंड के भारी बम गिराए हैं। इस ठिकाने का इस्तेमाल ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर नजर रखने और उन पर हमला करने के लिए एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और रडार सिस्टम को छिपाने के लिए कर रहा था। एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि इस हमले से ईरान की समुद्री रास्ते में बाधा डालने की क्षमता पर गहरा असर पड़ा है। इसके साथ ही, नतांज परमाणु केंद्र पर भी हमला किया गया है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने फिलहाल किसी भी रेडियोधर्मी रिसाव से इनकार किया है और वे मामले की जांच कर रहे हैं।
इस सैन्य कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और प्रभाव
अमेरिकी और इजरायली सेना की यह कार्रवाई ‘पूरी ताकत’ (Overwhelming Force) रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के सैन्य ढांचे को कमजोर किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई बड़ी घटनाओं का विवरण इस प्रकार है:
| तारीख | कार्रवाई और मुख्य विवरण |
|---|---|
| 21 मार्च 2026 | नतांज परमाणु केंद्र और होर्मुज के पास अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों पर भारी बमबारी। |
| 19 मार्च 2026 | अमेरिकी वायुसेना ने 120 से अधिक ईरानी जहाजों को नष्ट करने और 7,000 लक्ष्यों को साधने का दावा किया। |
| 18 मार्च 2026 | 5,000 पाउंड के ‘बंकर-बस्टर’ बमों का पहली बार इस्तेमाल कर सुरक्षित मिसाइल साइट्स को तोड़ा गया। |
| ईरान की प्रतिक्रिया | विदेश मंत्री अब्बास आरकची ने कहा कि वे युद्ध खत्म करने के लिए किसी भी पहल का स्वागत करेंगे। |
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस बीच खाड़ी देशों ने भी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और ईरान की ओर से आने वाले कुछ ड्रोन और मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी है।




