अमेरिका मिडिल ईस्ट में तैनात करेगा 3000 तक सैनिक, 82nd Airborne Division को मिला अलर्ट
अमेरिका अपने करीब 1,000 से 3,000 सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी कर रहा है। ये सैनिक US Army की 82nd Airborne Division से होंगे जो अपनी तेज़ी और खास ऑपरेशन के लिए जाने जाते हैं। यह तैनाती आने वाले कुछ ही दिनों या घंटों में शुरू हो सकती है। पेंटागन से इसका औपचारिक आदेश जल्द जारी होने की उम्मीद है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी सेना की तैनाती का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य फैसलों में ज़्यादा विकल्प देना है। 82nd Airborne Division एक ऐसी यूनिट है जो 18 से 24 घंटों के भीतर कहीं भी तैनात हो सकती है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Anna Kelly ने कहा है कि सेना से जुड़ी सभी घोषणाएं Department of War की तरफ से की जाएंगी। अभी तक ईरान में जमीनी सेना भेजने का कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
इस मिशन में कौन-कौन सी इकाइयां शामिल होंगी?
इस मिशन में 82nd Airborne Division के कमांडर Major Gen. Brandon Tegtmeier अपनी टीम के साथ मौजूद रहेंगे। इसमें 1st Brigade Combat Team की एक बटालियन भी शामिल होगी। यह तैनाती उन हजारों मरीन और नौसेना के जहाजों के अलावा है जो पहले से ही इस क्षेत्र की तरफ रवाना हो चुके हैं।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| सैनिकों की संख्या | 1,000 से 3,000 के बीच |
| खास यूनिट | 82nd Airborne Division |
| तैनाती की जगह | मिडल ईस्ट (Middle East) |
| तारीख | मार्च 24, 2026 के बाद से प्रभावी |
| मुख्य उद्देश्य | क्षेत्रीय सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति |
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के मीडिया आउटलेट्स ने भी इस खबर की पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि सैनिकों की यह रवानगी ईरान के साथ चल रहे विवाद और Strait of Hormuz की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके पास सभी सैन्य विकल्प खुले हुए हैं।





