अमेरिका और ईरान की बातचीत नाकाम, पाकिस्तान में नहीं बनी बात, ट्रंप ने दी नाकाबंदी की धमकी
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. दोनों देशों के बीच तनाव इतना ज़्यादा था कि कोई भी पक्ष दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हुआ. हालांकि, पूर्व परमाणु वार्ताकार Seyed Hossein Mousavian का मानना है कि दोनों देशों का एक मेज पर आना इस बात का संकेत है कि बातचीत का रास्ता अब भी खुला है.
बातचीत क्यों रही नाकाम और क्या थे मुख्य मुद्दे?
इस मीटिंग में अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी. मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को लेकर था. अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया. ईरान ने कहा कि अमेरिका उनका भरोसा जीतने में नाकाम रहा.
प्रमुख नेताओं और संस्थाओं ने क्या कहा?
| नाम/संस्था | मुख्य बयान |
|---|---|
| JD Vance (अमेरिकी उपाध्यक्ष) | ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानीं, यह उनके लिए बुरी खबर है. |
| Mohammad Bagher Ghalibaf (ईरान) | अमेरिका ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में नाकाम रहा. |
| Donald Trump (अमेरिकी राष्ट्रपति) | अमेरिकी नेवी होर्मुज जलडमरूमध्य की पूरी नाकाबंदी करेगी. |
| IRGC (ईरान की सेना) | नागरिक जहाजों के लिए रास्ता खुला है, लेकिन सैन्य जहाजों से सख्ती से निपटा जाएगा. |
| Seyed Hossein Mousavian (एक्सपर्ट) | बातचीत नाकाम होने के बावजूद डिप्लोमेसी का रास्ता खुला है. |
| Ishaq Dar (पाकिस्तानी विदेश मंत्री) | पाकिस्तान दोबारा बातचीत कराने की कोशिश जारी रखेगा. |
आगे क्या होगा और कितना है खतरा?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक दो हफ्ते का युद्धविराम (ceasefire) चल रहा है, जो 22 अप्रैल 2026 को खत्म होगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकाबंदी की धमकी दी है, जिससे खाड़ी देशों में तनाव बढ़ सकता है. अगर 22 अप्रैल तक कोई नया समझौता नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ेगा.




