US-Iran Talks: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान की बड़ी बैठक, पीएम शहबाज बोले यह ‘करो या मरो’ वाला मौका है
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बहुत बड़ी बातचीत शुरू हुई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। पूरी दुनिया की नज़रें अब अगले 48 घंटों पर टिकी हैं क्योंकि यह तय करेगा कि क्षेत्र में शांति आएगी या तनाव और ज्यादा बढ़ेगा।
ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
ईरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ कर रहे हैं। ईरान ने बातचीत के लिए अपनी कुछ ‘रेडलाइन्स’ यानी शर्तें तय की हैं। ईरान की मुख्य मांगें नीचे दी गई हैं:
- अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरानी पैसे को वापस करना।
- अमेरिकी और इजरायली हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा मिलना।
- लेबनान में एक ठोस और स्थायी युद्धविराम लागू करना।
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन के लिए एक स्पष्ट सिस्टम बनाना।
अमेरिका का क्या स्टैंड है और मुख्य मुद्दे क्या हैं?
अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। अमेरिका चाहता है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य हर हाल में खुला रहे। अमेरिकी अधिकारियों ने फिलहाल ईरान की उन शर्तों को मानने से इनकार किया है जिनमें पैसे वापस करने की बात कही गई है।
बैठक में शामिल मुख्य लोग और उनकी भूमिका
इस बातचीत में पाकिस्तान एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। बैठक की गंभीरता को देखते हुए इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल मुख्य लोग और टीमें इस प्रकार हैं:
| देश/भूमिका | मुख्य प्रतिनिधि |
|---|---|
| पाकिस्तान (मेजबान) | पीएम शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री ईशाक डार, जनरल आसिम मुनीर |
| ईरान | संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची |
| अमेरिका | उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस, स्टीव विटकोफ, जेरेड कुश्नर |
| अन्य | सऊदी अरब के वित्त मंत्री (आर्थिक समर्थन के लिए उपस्थित) |




