US-Iran युद्ध के कारण दुनिया भर में पेट्रोल के दाम में लगी आग, पाकिस्तान से अमेरिका तक भाव आसमान पर
अमेरिका और इस्राइल के ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध का असर अब पूरी दुनिया के आम लोगों पर दिखने लगा है. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस टकराव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से दुनिया भर में पेट्रोल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 85 देशों में तेल महंगा हो गया है, जिससे हवाई सफर से लेकर रोजमर्रा की चीजें महंगी होने का खतरा बढ़ गया है.
दुनिया के किन 10 देशों में सबसे ज्यादा बढ़ा पेट्रोल का भाव
ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज के ताजा आंकड़ों के अनुसार पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक उछाल इन 10 देशों में दर्ज किया गया है.
| देश (Country) | कितना बढ़ा दाम (Increase) |
|---|---|
| Vietnam | लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी ($1.13 प्रति लीटर) |
| Pakistan | 55 PKR प्रति लीटर का इजाफा |
| Laos | 33 प्रतिशत की वृद्धि |
| Cambodia | 19 प्रतिशत की वृद्धि |
| Australia | 18 प्रतिशत की वृद्धि |
| United States | 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी (कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा) |
| Bangladesh | सप्लाई में भारी कमी और आयात खर्च बढ़ा |
| South Korea | रिटेल दबाव के कारण सरकार ने प्राइस कैप लगाया |
| Thailand | अचानक दाम बढ़ने से सरकार को सब्सिडी देनी पड़ी |
| Japan | सप्लाई रुकने के कारण संरक्षण के उपाय शुरू |
खाड़ी देशों से तेल सप्लाई ठप होने का क्या होगा असर
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से तेल का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. दुनिया का 20 प्रतिशत से ज्यादा तेल होर्मुज के रास्ते आता है, जो फिलहाल पूरी तरह से बंद या सीमित कर दिया गया है. इसके अलावा ईरान ने सऊदी अरब के एक बड़े तेल क्षेत्र पर भी ड्रोन से हमला किया है.
इन सब घटनाओं के कारण 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था. हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बाजार को संभालने के लिए रिजर्व से 182 मिलियन बैरल तेल निकालने का प्रस्ताव दिया है, जिससे फिलहाल यह 88 से 91 डॉलर के बीच आ गया है. जेट फ्यूल (Jet Fuel) का दाम दोगुना होने से फ्लाइट के टिकट काफी महंगे हो गए हैं, जिसका सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है.




