अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने की कोशिश तेज, व्हाइट हाउस ने बातचीत को बताया सफल
अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बड़ी हलचल शुरू हुई है। व्हाइट हाउस ने 25 मार्च 2026 को बताया कि दोनों देशों के बीच शांति को लेकर हो रही बातचीत के नतीजे अभी तक अच्छे रहे हैं। राष्ट्रपति Trump ने भी इन चर्चाओं को लेकर उम्मीद जताई है और कहा है कि ईरान समझौते के लिए तैयार दिख रहा है। यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और अब दुनिया भर के देश इसे रोकने की कोशिश में लगे हैं।
ईरान ने शांति प्रस्ताव पर क्या कहा?
व्हाइट हाउस की ओर से सकारात्मक बयानों के बावजूद ईरान की सरकारी मीडिया ने कुछ अलग जानकारी दी है। ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें हकीकत से दूर हैं। इसके बदले ईरान ने अपना 5 बिंदुओं वाला नया प्रस्ताव सामने रखा है।
- ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाना बंद किया जाए।
- भविष्य में हमले न होने का पक्का भरोसा दिया जाए।
- युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना दिया जाए।
- Strait of Hormuz पर ईरान के अधिकार को मान्यता मिले।
- दोनों देशों के बीच तुरंत जंग रोकी जाए।
दुनिया के देश और संयुक्त राष्ट्र की क्या है भूमिका?
इस जंग को रोकने के लिए Pakistan, Egypt और Turkey जैसे देश मध्यस्थता कर रहे हैं। खबर है कि पाकिस्तान युद्धविराम की बातचीत के लिए मेजबानी कर सकता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने भी दोनों पक्षों से तुरंत जंग रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह युद्ध काबू से बाहर हो रहा है और इसे रोकना बहुत जरूरी है।
| मुख्य जानकारी | विवरण |
|---|---|
| युद्ध की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 |
| अमेरिकी सेना की हलचल | 3000 पैराट्रूपर्स मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की |
| अमेरिका की चेतावनी | समझौता न होने पर सख्त सैन्य कार्रवाई की बात कही |
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने साफ किया है कि अगर ईरान अपनी हार स्वीकार नहीं करता और समझौता नहीं होता है, तो राष्ट्रपति Trump सख्त कार्रवाई के लिए तैयार हैं। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि बातचीत के हालात अभी बदल रहे हैं और कूटनीतिक बातों को मीडिया में ज्यादा साझा नहीं किया जाएगा। फिलहाल शांति की उम्मीदें बनी हुई हैं लेकिन जमीनी स्तर पर सेना की तैनाती भी जारी है।




