US-Iran War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान को बड़ी धमकी, बोले देश को वापस पत्थर युग में पहुंचा देंगे
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान पर बमबारी कर रहा है और आने वाले कुछ हफ्तों में उसे पत्थर युग (Stone Age) में वापस भेज देगा। ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जल्द नहीं खोला, तो अंजाम और भी बुरा हो सकता है। यह बयान 2 अप्रैल 2026 को सामने आया है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बड़े दावे किए हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि ईरान के नए राष्ट्रपति ने युद्धविराम (Ceasefire) की गुजारिश की थी। हालांकि, ट्रंप ने शर्त रखी है कि जब तक Strait of Hormuz पूरी तरह से खुला और सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक वह इस पर विचार नहीं करेंगे। ट्रंप का कहना है कि अगले दो से तीन हफ्तों में अमेरिका ईरान पर बहुत कड़ा प्रहार करेगा और उसे मलबे के ढेर में बदल देगा। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के युद्धविराम वाले दावे को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है।
जंग के मौजूदा हालात और अब तक का नुकसान
US Central Command (CENTCOM) ने इस युद्ध को लेकर कुछ ताजा आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि जंग में अब तक कितना बड़ा नुकसान हुआ है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| अब तक हिट किए गए कुल टारगेट | 12,300 से ज्यादा |
| नष्ट या क्षतिग्रस्त ईरानी जहाज | 155 से ज्यादा |
| अमेरिकी सेना की कुल कॉम्बैट फ्लाइट्स | 13,000 |
| ट्रंप द्वारा दी गई अंतिम तारीख | 6 अप्रैल 2026 |
ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान 6 अप्रैल तक Strait of Hormuz को नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके बिजली घरों और पानी के प्लांटों को पूरी तरह तबाह कर देगा।
ईरान का इस पूरे मामले पर क्या कहना है?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ़ कर दिया है कि उनके देश को धमकियों और समय सीमा (Deadlines) की भाषा में नहीं समझाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ईरान लड़ाई जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार है और अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी जनता के नाम एक खुला खत लिखकर शांति की अपील की है। इस युद्ध की वजह से अमेरिका और NATO देशों के बीच भी तनाव बढ़ गया है क्योंकि कई सहयोगी देश इस जंग में अमेरिका का खुलकर साथ नहीं दे रहे हैं।




