ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पेंटागन द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि 365 सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को काफी कमजोर कर दिया है, लेकिन नुकसान का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। इस जंग का असर खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर साफ देखा जा रहा है।

📰: Kuwait Airways का बड़ा ऐलान, मनीला के लिए उड़ानें 8 अप्रैल से होंगी शुरू, भारत के इन शहरों को भी मिलेगा फायदा.

अमेरिकी सेना के किस विभाग को कितना नुकसान हुआ?

पेंटागन ने घायलों का विभाग के अनुसार पूरा ब्यौरा दिया है, जिसमें सेना के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा है। घायलों में अधिकांश मिड और सीनियर रैंक के सैनिक बताए जा रहे हैं जिनकी संख्या करीब 200 है।

विभाग का नाम घायल सैनिकों की संख्या
अमेरिकी थल सेना (Army) 247
अमेरिकी नौसेना (Navy) 63
मरीन कॉर्प्स (Marine) 19
वायु सेना (Air Force) 36

इन आंकड़ों में 85 अधिकारी और 80 जूनियर रैंक के जवान भी शामिल हैं। हालांकि, हाल ही में हुए लड़ाकू विमान क्रैश की घटनाओं में घायल हुए सैनिकों की संख्या को इसमें शामिल किए जाने पर अभी स्थिति साफ नहीं है। अधिकांश घायल जवान इलाज के बाद वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं।

सैनिकों की मौत और हालिया विमान हमलों की जानकारी

इस संघर्ष में जान गंवाने वाले 13 सैनिकों में से 7 की मौत दुश्मन की सीधी कार्रवाई में हुई है, जबकि अन्य तकनीकी हादसों का शिकार हुए हैं। इसकी विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:

  • कुवैत में हुए ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी।
  • सऊदी अरब में घायल होने के बाद इलाज के दौरान एक और सैनिक ने दम तोड़ दिया।
  • बाकी 6 सैनिकों की मौत एक अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमान के क्रैश होने से हुई है, जिसे गैर-युद्ध श्रेणी में रखा गया है।
  • ईरान ने मध्य ईरान में एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू जेट को मार गिराने का दावा किया है, जिसका एक पायलट सुरक्षित है और दूसरे की तलाश जारी है।
  • फारस की खाड़ी में बचाव कार्य में जुटे एक A-10 विमान को भी गिराने का दावा किया गया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्वीकार किया है कि सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के बावजूद हर ड्रोन या मिसाइल हमले को 100 प्रतिशत रोकना मुमकिन नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह तनाव चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि कुवैत, सऊदी और बहरीन जैसे इलाकों में भी हमले और मलबे गिरने की खबरें आई हैं।