US Military Budget: अमेरिका का रक्षा बजट 1 ट्रिलियन डॉलर के पार, ईरान युद्ध से हथियार कंपनियों की बम्पर कमाई
अमेरिका दुनिया में सेना पर सबसे ज़्यादा खर्च करने वाला देश बन गया है। साल 2025 के लिए अमेरिका का रक्षा बजट लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर (997 बिलियन डॉलर) तक पहुँच गया है, जो उसके बाद के 9 देशों के कुल खर्च से भी ज़्यादा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2027 तक इसे बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। इस बीच चल रहे ईरान युद्ध का सीधा फायदा अमेरिका और इज़राइल की हथियार बनाने वाली कंपनियों को हो रहा है।
ईरान युद्ध में अमेरिका का कितना हो रहा है खर्च?
अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे Operation Epic Fury को 11 दिन पूरे हो गए हैं। इस सैन्य अभियान में अमेरिका हर दिन लगभग 2 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। विमानवाहक पोत (Carrier strike groups) को ऑपरेट करने का खर्च ही 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन आ रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार अब तक ईरान के अंदर 3,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए हैं। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन ने रक्षा मंत्रालय (Pentagon) का नाम बदलकर Department of War कर दिया है।
हथियार बनाने वाली कंपनियों को कैसे हो रहा फायदा?
इस युद्ध के शुरू होने के बाद से ही डिफेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल देखा गया है। शेयर बाजार में Northrop Grumman के शेयर 5 प्रतिशत, RTX के 4.5 प्रतिशत और Lockheed Martin के शेयर 3 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
- अमेरिका ने इज़राइल को तुरंत 12,000 बम बेचने की मंज़ूरी दी है।
- इज़राइल की Elbit Systems जैसी कंपनियों को भी इस युद्ध से बड़ा फायदा मिल रहा है।
- सीनेटर Lindsey Graham ने भी बयान दिया है कि युद्ध के प्रयासों से काफी पैसा बनाया जाएगा।
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक आदेश जारी कर रक्षा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे मुनाफे का पैसा शेयर बायबैक में लगाने के बजाय अपनी प्रोडक्शन बढ़ाने में लगाएं।
कच्चे तेल और आम लोगों पर क्या पड़ेगा इसका असर?
युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं। इससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और दुनिया भर के आम लोगों पर महंगाई का सीधा असर पड़ सकता है। हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 1,255 लोगों की जान गई है, जबकि इज़राइल में 11 लोग मारे गए हैं।





