US Naval Blockade: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, 10 हजार सैनिक और युद्धपोत तैनात, दुनिया भर में तनाव बढ़ा
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों को चारों तरफ से घेर लिया है। US Central Command ने बताया कि इस मिशन में 10 हजार से ज्यादा मरीन, नाविक और वायु सैनिक शामिल हैं। उनके साथ दर्जनों युद्धपोत और विमान भी तैनात किए गए हैं ताकि ईरान आने-जाने वाले जहाजों को रोका जा सके। यह कदम दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
यह घेराबंदी क्यों हुई और कैसे काम करेगी?
यह कार्रवाई 14 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे शुरू हुई। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति बातचीत विफल रहने के बाद यह फैसला लिया गया। US Central Command के मुताबिक, यह घेराबंदी उन सभी जहाजों पर लागू होगी जो ईरान के बंदरगाहों या तटीय क्षेत्रों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा अन्य बंदरगाहों के लिए जा रहे हैं, उन्हें रास्ता दिया जाएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या बयान आए?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस ऑपरेशन के बाद सख्त चेतावनी दी कि अगर कोई जहाज इस घेराबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। दूसरी तरफ, ईरान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी और समुद्री डकैती करार दिया है। ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने UN को पत्र लिखकर इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। वहीं ईरान की सेना ने धमकी दी है कि अगर उनके बंदरगाहों की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा और मौजूदा स्थिति क्या है?
चीन ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इससे तनाव और बढ़ेगा। UN के महासचिव Antonio Guterres ने सभी पक्षों से जहाजों की आवाजाही का सम्मान करने की अपील की है। Food and Agriculture Organization (FAO) ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में यह रुकावट लंबी चली, तो दुनिया भर में भोजन की भारी कमी हो सकती है।
| मुख्य विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुरुआत की तारीख | 14 अप्रैल 2026 |
| तैनात सैनिक | 10,000 से ज्यादा (मरीन, नाविक, वायु सैनिक) |
| सैन्य ताकत | दर्जनभर युद्धपोत और दर्जनों विमान |
| विफल बातचीत | इस्लामाबाद में 12-13 अप्रैल को हुई बैठक |
| जहाजों की स्थिति | 6 व्यापारिक जहाजों को वापस मुड़ना पड़ा |
| विवादित जहाज | Rich Starry (चीन के स्वामित्व वाला जहाज) |
| मुख्य चिंता | वैश्विक खाद्य संकट की संभावना |




