पेंटागन ने किया बड़ा ऐलान, दुश्मन को पूरी तरह खत्म करने तक नहीं रुकेंगे अमेरिकी सैनिक
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य तनाव अब और गंभीर हो गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ किया है कि जब तक दुश्मन पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैनिक अपने अभियान से पीछे नहीं हटेंगे। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से चल रहे इस सैन्य अभियान का असर अब खाड़ी देशों पर भी दिखने लगा है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि वे बिना रुके पूरी ताकत के साथ हमले जारी रखेंगे।
इस सैन्य अभियान का खर्च और मुख्य टारगेट क्या हैं?
- अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार पहले ही हफ्ते में इस अभियान पर करीब 6 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है।
- कुल खर्च में से 4 अरब डॉलर सिर्फ आधुनिक मिसाइल और उन्हें रोकने वाले सिस्टम पर खर्च किए गए हैं।
- अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल फैक्ट्री और नौसेना के ठिकानों को तबाह करना है।
- CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया है कि अब तक ईरान के 30 युद्धपोत नष्ट किए जा चुके हैं।
- अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को भी डुबो दिया है।
- युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की तरफ से होने वाले मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सऊदी अरब और वहां रहने वाले प्रवासियों पर इसका क्या असर है?
इस युद्ध का सीधा असर अब सऊदी अरब और वहां काम करने वाले आम प्रवासियों पर भी पड़ने लगा है। एक रिहायशी इलाके में ईरान की तरफ से दागे गए प्रोजेक्टाइल के गिरने से सऊदी अरब में दो विदेशी नागरिकों की जान चली गई है। इस घटना में 12 अन्य लोग घायल भी हुए हैं जिससे खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों की चिंता काफी बढ़ गई है।
इस हमले के बाद रियाद ने तेहरान को सख्त संदेश दिया है। सऊदी अरब ने कहा है कि अगर उनके ऊर्जा ठिकानों पर इस तरह के हमले जारी रहे तो वे अमेरिकी सेना को अपने बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पहले खाड़ी देशों से माफी मांगी थी लेकिन बाद में उन्होंने भी चेतावनी दी कि जो देश अपनी जमीन का इस्तेमाल हमले के लिए करने देगा उसे भी निशाना बनाया जाएगा।





