US Warns NATO: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने दी चेतावनी, ईरान के खिलाफ मदद नहीं की तो नाटो को भुगतने होंगे गंभीर नतीजे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो (NATO) देशों को एक सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की मदद नहीं की, तो नाटो को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। यह बयान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत हो रहे ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच आया है। ट्रम्प ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में यह बात साफ कर दी है कि सहयोग न मिलने पर नाटो का भविष्य खराब हो सकता है।
क्या है अमेरिका की मांग और पूरा विवाद?
ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि नाटो देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका का साथ देना होगा। अमेरिका चाहता है कि सहयोगी देश अपनी माइन-क्लियरिंग शिप, युद्धपोत और स्पेशल फोर्स भेजें ताकि ईरान के तटों पर मौजूद खतरों को खत्म किया जा सके।
ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध में बिना किसी दायित्व के बड़ी मदद की थी, इसलिए अब नाटो देशों को भी मध्य पूर्व में उनका साथ देना चाहिए। इस बीच, खबर है कि ब्रिटेन इस मामले में मदद के लिए ड्रोन भेजने की योजना बना रहा है। अमेरिका ने चीन को भी इसमें सहयोग करने को कहा है क्योंकि उसका 90 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से आता है।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या असर हो रहा है?
इस संघर्ष का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां यात्रा करने वालों पर पड़ रहा है।
- सऊदी अरब: रक्षा मंत्रालय ने राजधानी रियाद और तेल वाले पूर्वी क्षेत्रों पर दागे गए 10 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया है।
- यूएई: फुजैराह में एक तेल प्लांट में ड्रोन के मलबे से आग लग गई थी, हालांकि आग पर काबू पा लिया गया है और 16 मार्च से काम दोबारा शुरू हो गया है।
- फ्लाइट्स पर असर: सुरक्षा कारणों से एमिरेट्स और इंडिगो जैसी बड़ी विमान कंपनियों ने इस क्षेत्र में अपनी उड़ानें रोक दी हैं या उनका रूट बदल दिया है।
- खेल आयोजन रद्द: अप्रैल में होने वाले बहरीन और सऊदी अरब ग्रां प्री (Grand Prix) को भी सुरक्षा के चलते कैलेंडर से हटा दिया गया है।
ईरान ने भी दी जवाबी धमकी
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर उनके खार्ग द्वीप जैसी ऊर्जा संपत्तियों पर बमबारी की गई, तो वे मध्य पूर्व में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को अपना निशाना बनाएंगे। इस बीच इजरायली सेना ने भी ईरान में कई हजारों नए ठिकानों की पहचान करने की बात कही है। यह स्थिति खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय प्रवासियों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।




