America Iran War: अमेरिका ने 48 घंटे में ईरान पर दागे 5.6 बिलियन डॉलर के हथियार, हथियारों के भंडार में आई कमी
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य अभियान ‘Operation Epic Fury’ में पैसों और हथियारों का भारी खर्च सामने आया है। पेंटागन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने इस हमले के पहले 48 घंटों में ही 5.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियार इस्तेमाल कर लिए हैं। इतनी तेजी से महंगे हथियारों के खर्च ने अमेरिकी सैन्य भंडार में कमी की चिंता पैदा कर दी है। इसके साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे इस तनाव का असर अब आम आदमी की जेब पर भी पड़ने लगा है क्योंकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा के दामों में उछाल देखा जा रहा है।
हथियारों और युद्ध पर कितना पैसा हुआ खर्च?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ यह संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका इस युद्ध में रोजाना करीब 891 मिलियन डॉलर से लेकर 1 बिलियन डॉलर तक खर्च कर रहा है। पहले सप्ताह का कुल खर्च लगभग 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें से 4 बिलियन डॉलर सिर्फ हथियारों और एडवांस इंटरसेप्टर पर खर्च हुए हैं।
अब अमेरिका महंगे लॉन्ग-रेंज मिसाइलों की जगह सस्ते JDAMs और लेजर-गाइडेड बमों का इस्तेमाल कर रहा है ताकि पैसों की बचत हो सके। इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग ने आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट का इस्तेमाल करते हुए इजराइल को बिना कांग्रेस की लंबी प्रक्रिया के 20,000 बम सौंपे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 मार्च को अपने बयान में कहा था कि यह ऑपरेशन काफी हद तक पूरा हो चुका है।
दुनिया और आम लोगों पर इसका क्या असर होगा?
इस भारी खर्च और हथियारों की सप्लाई कम होने से दुनिया भर में सुरक्षा की चिंताएं बढ़ गई हैं। पेंटागन ने साउथ कोरिया से THAAD सिस्टम और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से पैट्रियट मिसाइलों को मध्य पूर्व में भेजना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे चीन और यूक्रेन जैसे अन्य वैश्विक खतरों के सामने अमेरिका की सैन्य तैयारी कमजोर पड़ सकती है।
वहीं आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। युद्ध के कारण ऊर्जा ढांचे पर असर पड़ा है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में 27 सेंट प्रति गैलन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर यह तनाव ऐसे ही चलता रहा तो खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और अन्य देशों में भी ईंधन की कीमतों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। अमेरिकी संसद इस भारी खर्च से देश के बजट पर पड़ने वाले दबाव को लेकर भी सवाल उठा रही है।





