US Navy Aircraft Carrier: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट भेजा अपना ताकतवर विमानवाहक पोत, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला
अमेरिकी नौसेना का ताकतवर विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush (CVN 77) मिडिल ईस्ट के लिए रवाना हो गया है। वर्जीनिया के Norfolk नेवल स्टेशन से मंगलवार सुबह 31 मार्च 2026 को यह पोत अपनी निर्धारित तैनाती के लिए निकला है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक यह पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है लेकिन इसे ईरान के साथ चल रहे मौजूदा हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के तहत यह पोत अपनी सेवाएं देगा।
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इस तैनाती में क्या-क्या शामिल है और मिशन क्या है?
इस मिशन पर केवल विमानवाहक पोत ही नहीं बल्कि पूरा स्ट्राइक ग्रुप जा रहा है जो सैन्य शक्ति को काफी मजबूत बनाता है। इस ग्रुप की मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
- USS George H.W. Bush विमानवाहक पोत के साथ USS Ross और USS Donald Cook जैसे घातक युद्धपोत शामिल हैं।
- इसमें USS Mason डिस्ट्रॉयर और Carrier Air Wing (CVW) 7 के नौ स्क्वाड्रन भी साथ चल रहे हैं।
- कुल मिलाकर 5,000 से ज्यादा सैनिक और कर्मचारी इस पूरे स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा हैं।
- कैप्टन रॉबर्ट बिब्यू ने रवानगी के वक्त बताया कि उनकी टीम पूरी तरह से ट्रेंड है और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है।
मिडिल ईस्ट के हालातों पर इसका क्या असर होगा?
वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस पोत की तैनाती ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच की जा रही है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि यह पोत क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशंस में मदद करेगा। मिडिल ईस्ट में पहले से ही USS Abraham Lincoln मौजूद है और USS Gerald R. Ford भी हाल ही में क्षेत्र में तैनात था। अगर यह तीनों पोत वहां एक साथ रहते हैं तो अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी वहां सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगी। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर सुरक्षा और सैन्य हलचल के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।




