आंध्र प्रदेश के एविएशन सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला जब विशाखापट्टनम के नजदीक बन रहे नए एयरपोर्ट पर पहली बार विमान ने सफल लैंडिंग की। GMR ग्रुप द्वारा ‘न्यू विजाग एयरपोर्ट’ (New Visakhapatnam Airport) के रूप में विकसित किए जा रहे इस प्रोजेक्ट ने 4 जनवरी 2026 को अपना पहला और सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट पास कर लिया है। इस सफल टेस्ट और वैलिडेशन फ्लाइट के बाद अब कमर्शियल उड़ानों का रास्ता साफ हो गया है, जिससे क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
विशाखापट्टनम से 50 किलोमीटर दूर स्थित एयरपोर्ट का आधिकारिक नाम अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट रखा गया
यह नया ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगापुरम इलाके में स्थित है। भौगोलिक रूप से यह विशाखापट्टनम शहर से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर दिशा में है। प्रोजेक्ट के नामकरण और संचालन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है। इसका आधिकारिक नाम ‘अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ (भोगापुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट) है। इस विशाल परियोजना का जिम्मा GMR विशाखापट्टनम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GVIAL) के पास है, जो देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड की ही एक सब्सिडियरी है।
जून 2026 से कमर्शियल उड़ानें शुरू करने की तैयारी, 97 प्रतिशत निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँचा
तकरीबन 2,700 एकड़ भूमि पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत बन रहे इस एयरपोर्ट का काम युद्धस्तर पर जारी है। इसे DBFOT (डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) आधार पर तैयार किया जा रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार, जनवरी 2026 तक लगभग 97% कंस्ट्रक्शन पूरा कर लिया गया है। अब केवल कुछ सिविल और इंटीरियर फिनिशिंग का काम बाकी है। प्रबंधन ने लक्ष्य रखा है कि सभी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए 26 जून 2026 से यहाँ से कमर्शियल यानी आम यात्रियों के लिए उड़ानें शुरू कर दी जाएंगी।
वाइड-बॉडी विमानों की लैंडिंग के लिए 3,800 मीटर लंबा रनवे और सालाना 60 लाख यात्रियों की क्षमता
एयरपोर्ट के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहाँ का रनवे लगभग 3,800 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है, जो CAT-I सुविधा से लैस है। इसका सीधा मतलब यह है कि यहाँ बड़े और वाइड-बॉडी वाले अंतरराष्ट्रीय विमान आसानी से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकेंगे। क्षमता की बात करें तो पहले फेज में यह एयरपोर्ट सालाना लगभग 6 मिलियन (60 लाख) पैसेंजर्स को हैंडल करने में सक्षम होगा। भविष्य के चरणों में इस क्षमता को बढ़ाकर 18 से 40 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष तक ले जाने का मास्टर प्लान तैयार है।
हाई-एंड सुविधाओं से लैस होगा 62,500 वर्गमीटर का टर्मिनल, यात्रियों को मिलेंगी वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए टर्मिनल बिल्डिंग को बेहद आधुनिक बनाया गया है। पहली पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग का क्षेत्रफल करीब 62,500 वर्गमीटर है, जिसमें सेंट्रल प्रोसेसर, पियर, एयरपोर्ट प्लाज़ा और फोरकोर्ट शामिल हैं। टर्मिनल के भीतर मॉडर्न चेक-इन काउंटर्स, बैगेज स्कैनिंग सिस्टम, इमिग्रेशन-एमिग्रेशन डेस्क, आलीशान लाउंज, ड्यूटी-फ्री रिटेल शॉप्स, फूड कोर्ट और सेल्फ-सर्विस कियोस्क जैसी हाई-एंड सुविधाएँ मौजूद रहेंगी। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए अलग से टैक्सी और बस ड्रॉप-ऑफ ज़ोन भी प्लान किए गए हैं।
नॉर्थ आंध्र का बड़ा कार्गो हब बनने के साथ ही चक्रवाती तूफानों को झेलने में भी सक्षम होगा एयरपोर्ट
सिर्फ यात्री ही नहीं, बल्कि यह एयरपोर्ट व्यापारिक गतिविधियों का भी केंद्र बनेगा। इसे नॉर्थ आंध्र के एक बड़े कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ कोल्ड स्टोरेज, ऑटोमेटेड कन्वेयर और बॉन्डेड वेयरहाउस जैसी सुविधाएँ होंगी। इसके अलावा, परिसर में 25 एकड़ में MRO (मेंतेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा भी बनाई जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से भी यह एयरपोर्ट बेजोड़ है। तटीय क्षेत्र में होने के कारण इसे लगभग 275 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली चक्रवाती हवाओं और भारी बारिश को झेलने लायक विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। 4 जनवरी को एयर इंडिया की वैलिडेशन फ्लाइट के जरिए रनवे और नेविगेशन सिस्टम की टेस्टिंग भी पूरी तरह सफल रही है।





