वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, जिसका सीधा असर अब भारतीय मुद्रा बाजार पर दिखाई देने लगा है। इस नए संकट के चलते इस हफ्ते भारतीय रुपये की चाल बिगड़ सकती है। बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का अनुमान है कि डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होकर 90.50 से 91 के स्तर तक गिर सकता है। निवेशक वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है।
वेनेजुएला संकट से वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल, निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से डॉलर की मांग में जोरदार तेजी
वैश्विक पटल पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय करेंसी मार्केट पर साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। वेनेजुएला में हाल ही में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में घबराहट का माहौल है। अनिश्चितता के इस दौर में निवेशक जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित मुद्राओं में लगा रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपया दबाव में आ गया है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से रुपये में कमजोरी का रुझान लगातार बना हुआ है और यह वैश्विक अस्थिरता के प्रति बेहद संवेदनशील हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका से उभरते बाजारों की मुद्राओं पर बढ़ा जोखिम, भारत पर भी पड़ सकता है असर
वेनेजुएला एक प्रमुख तेल निर्यातक देश है, इसलिए वहां की अस्थिरता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि भारत वेनेजुएला से अपनी जरूरत का 1 प्रतिशत से भी कम तेल आयात करता है, लेकिन वैश्विक तनाव और जवाबी कार्रवाई का डर पूरे तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। जब भी कच्चे तेल में उबाल आता है या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो भारत जैसे उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए इसे नकारात्मक माना जाता है। यही कारण है कि रुपये पर दोहरी मार पड़ती दिखाई दे रही है।
रिजर्व बैंक के अगले कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें, 13 जनवरी को होने वाला डॉलर-रुपया स्वैप होगा बेहद अहम
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका अब काफी अहम हो गई है। हालांकि RBI ने रुपये को सहारा देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन बाजार की नजरें अब 13 जनवरी की तारीख पर टिकी हैं। इस दिन रिजर्व बैंक 10 अरब डॉलर का एक बड़ा डॉलर-रुपया स्वैप करने वाला है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक यह बड़ा कदम नहीं उठाया जाता, तब तक रुपया 90.50 से 91 प्रति डॉलर की रेंज में फिसल सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्रीय बैंक किस स्तर पर जाकर बाजार में हस्तक्षेप करता है।
आम आदमी की जेब पर बढ़ सकता है बोझ: आयात महंगा होने के साथ पेट्रोल-डीजल और महंगाई बढ़ने का सता रहा है डर
रुपये की इस गिरावट का असर केवल शेयर बाजार या करेंसी मार्केट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से देश में आयात महंगा होने की पूरी संभावना है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए रुपये की कमजोरी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, आयातित सामान महंगा होने से देश में महंगाई दर में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। साथ ही, इस अनिश्चितता के माहौल में शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।





