भारतीय प्रॉपर्टी खरीदारों को चेतावनी दी गई है कि वे विदेश में संपत्ति खरीदने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड (ICC) का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह कई देशों के कानूनों का उल्लंघन करने के साथ-साथ गंभीर आर्थिक और कानूनी जोखिम भी पैदा करता है। रियल एस्टेट और टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड का उपयोग केवल करेंट अकाउंट ट्रांज़ैक्शंस (जैसे शॉपिंग, यात्रा, शिक्षा) के लिए ही किया जा सकता है, न कि विदेशों में संपत्ति जैसी कैपिटल अकाउंट इन्वेस्टमेंट्स के लिए। हाल ही में कुछ भारतीय खरीदारों को दुबई में प्रॉपर्टी खरीदते समय इस कारण से नियामक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
एंडरसन यूएई के सीईओ अनुराग चतुर्वेदी ने बताया कि भारतीय कानून, विशेषकर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत विदेशों में संपत्ति खरीदना कैपिटल अकाउंट ट्रांज़ैक्शन माना जाता है। जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड का उपयोग केवल करंट अकाउंट ट्रांज़ैक्शंस तक सीमित है। इस प्रकार, आईसीसी से विदेश में प्रॉपर्टी का भुगतान करना भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों को दरकिनार करना है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के निवेश केवल लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत ही संभव हैं।
LRS के अनुसार, भारतीय निवासी एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम $250,000 तक की राशि अधिकृत बैंकों के माध्यम से विदेश भेज सकते हैं, जिसमें टैक्स अनुपालन और नियामक निगरानी शामिल रहती है। इसलिए विदेशों में प्रॉपर्टी के लिए भुगतान केवल अधिकृत बैंक और उचित दस्तावेज़ीकरण के साथ ही होना चाहिए।
चतुर्वेदी ने चेतावनी दी कि इस नियम का उल्लंघन करने पर खरीदार को RBI, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, क्रेडिट कार्ड से इस तरह का भुगतान आर्थिक रूप से भी नुकसानदेह है क्योंकि इसमें उच्च ब्याज़ दर, विदेशी मुद्रा शुल्क और लेट फीस जैसी अतिरिक्त लागतें शामिल होती हैं।
JSB इन्कॉरपोरेशन के सीईओ गौरव केसवानी ने भी कहा कि भारतीय निवेशकों को दुबई या किसी भी विदेश में प्रॉपर्टी खरीदते समय FEMA और LRS का पालन करना चाहिए। सभी भुगतान अधिकृत बैंक के जरिए होने चाहिए और खरीदार के पास कम से कम एक साल पुराना बैंक खाता होना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेवलपर्स और एजेंटों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे पारदर्शी और नियमों के अनुरूप लेन-देन को बढ़ावा दें। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि किसी भी विदेशी संपत्ति में पैसा लगाने से पहले वित्तीय या कानूनी सलाह अवश्य लें और सभी भुगतान सही बैंकिंग चैनल से ही करें।





