पश्चिम एशिया संकट: बासमती चावल के 6000 कंटेनर फंसे, पंजाब-हरियाणा के किसानों पर बढ़ा खतरा
पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का सीधा असर अब भारत के व्यापार पर दिखने लगा है। समुद्र के रास्ते होने वाला कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, खासकर Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका से तेल और चावल की सप्लाई चेन अटक गई है। गुजरात के कंधला और मुंद्रा बंदरगाहों पर बासमती चावल से भरे हजारों कंटेनर फंस गए हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
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बासमती चावल के निर्यात पर क्यों लगी रोक?
ईरान और इज़राइल के संघर्ष के कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। इस वजह से भारत से बाहर जाने वाले बासमती चावल का एक बड़ा हिस्सा बंदरगाहों पर ही रुक गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 2 लाख से 4 लाख टन बासमती चावल के कंटेनर इस समय कंधला और मुंद्रा बंदरगाहों या समुद्र के बीच फंसे हुए हैं।
- फंसे हुए कंटेनर: करीब 3,000 से 6,000 कंटेनर अटक गए हैं।
- प्रमुख खरीदार: भारत का सबसे ज्यादा बासमती चावल (करीब 40%) ईरान और सऊदी अरब जैसे देश खरीदते हैं।
- किराया बढ़ा: जहाजों का किराया (Freight Rates) $1,500 से बढ़कर $3,500-$4,500 हो गया है।
- बीमा महंगा: समुद्री रास्तों पर जोखिम बढ़ने से इंश्योरेंस का खर्च भी 40-50% बढ़ गया है।
तेल की कीमतों और आम आदमी पर इसका असर
सिर्फ चावल ही नहीं, भारत की ऊर्जा जरूरतों पर भी इस संकट का गहरा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 60-80% गैस (LPG/LNG) इसी ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते मंगाता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $80-$85 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अगर कच्चे तेल में 1 डॉलर की भी बढ़ोतरी होती है, तो भारत का आयात बिल सालाना अरबों डॉलर बढ़ जाता है। सरकार अब रूस से तेल आयात बढ़ाने और वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रही है।
किसानों और व्यापारियों की बढ़ी मुसीबतें
बंदरगाहों पर माल रुकने से निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्हें वहां कंटेनर खड़े रखने के लिए अलग से ‘डेमरेज चार्ज’ (Demurrage) देना पड़ रहा है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
इसका सबसे बुरा असर पंजाब और हरियाणा के किसानों पर पड़ रहा है:
- कीमतों में गिरावट: मंडियों में बासमती चावल की थोक कीमतों में पिछले 3 दिनों में 7-10% की गिरावट आई है।
- प्रभावित परिवार: इस संकट से करीब 25 से 30 लाख किसान परिवारों की आय पर असर पड़ेगा।
- भुगतान का संकट: ईरान के साथ बैंकिंग चैनल प्रभावित होने से पुराने माल का पेमेंट भी फंसने का डर है।




