West Asia में चल रहे संकट की वजह से भारत के दवा उद्योग पर असर दिख रहा है। माल भेजने का किराया और बीमा महंगा होने से दवाओं के कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। Indian Pharmaceutical Alliance (IPA) ने इस बात की पुष्टि की है कि इससे सप्लाई चेन में मुश्किलें आ रही हैं। सरकार और इंडस्ट्री दोनों मिलकर काम कर रहे हैं ताकि मरीजों को दवाओं की किल्लत न हो।

सरकार ने राहत देने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

दवाओं के इनपुट कॉस्ट को कम करने के लिए भारत सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। 1 अप्रैल 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी हटा दी गई थी। इसके अलावा, मॉर्फोलिन जैसे जरूरी कच्चे माल के लिए क्वालिटी कंट्रोल नियमों में अस्थायी तौर पर ढील दी गई है ताकि सप्लाई बनी रहे।

सरकार ने जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नीचे दिए गए कदम उठाए हैं:

कदम/सामग्री विवरण
कस्टम ड्यूटी 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क हटाया गया
प्रोपलीन सप्लाई प्रो-राटा बेसिस पर बढ़ाई गई
अमोनिया उत्पादन बनाए रखने के लिए आवंटन बढ़ाया गया
मेथनॉल सप्लाई चेन को दुरुस्त करने के उपाय किए गए
RoDTEP रेट्स निर्यात उत्पादों पर टैक्स रिफंड दरों को बहाल किया गया
Morpholine क्वालिटी कंट्रोल नियमों में ढील दी गई

दवाओं की कीमतों और उपलब्धता पर क्या असर होगा?

कुछ दवा निर्माताओं का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से कुछ उत्पादों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और कुछ मामलों में यह उछाल 300 प्रतिशत तक गया है। वहीं, दिल्ली नेटवर्क ऑफ पॉजिटिव पीपल ने जीवन रक्षक ARV दवाओं की सप्लाई में रुकावट आने की चिंता जताई है।

हालांकि, Department of Pharmaceuticals के जॉइंट सेक्रेटरी सत्यप्रकाश टीएल ने बताया है कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन टूटने के बावजूद घरेलू बाजार में दवाओं की कीमतें अब तक काफी हद तक स्थिर रही हैं। सरकार लगातार इंटरमीडिएट्स की उपलब्धता की निगरानी कर रही है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों का क्या कहना है?

IPA के महासचिव सुदर्शन जैन ने बताया कि माल ढुलाई, बीमा और सॉल्वेंट्स के खर्चों में निश्चित रूप से बढ़ोतरी हुई है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट का सीधा असर ऊर्जा सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिसकी वजह से दवाओं में इस्तेमाल होने वाले इंटरमीडिएट्स महंगे हो गए हैं।

CIPI के सलाहकार विनोद कलानी ने आगाह किया है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत के ड्रग मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए यह एक बड़ा संकट बन सकता है। उन्होंने बताया कि API और उनके इंटरमीडिएट्स की कीमतों में पहले ही बढ़ोत्तरी देखी जा चुकी है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.