यमन के हूती विद्रोहियों ने इज़रायल पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
यमन के हूती विद्रोहियों ने इज़रायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। 28 मार्च 2026 को हूती प्रवक्ता Yahya Saree ने इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी लेते हुए एक बयान जारी किया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में पहले से ही काफी तनाव है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि इज़रायल के खिलाफ उनकी यह सैन्य कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।
हूतियों ने इस हमले के पीछे क्या कारण बताया है?
हूती प्रवक्ता ने अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई ईरान और फिलिस्तीन सहित अन्य प्रतिरोध मोर्चों के समर्थन में की गई है। उनका कहना है कि यह हमला इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा क्षेत्र में की जा रही गतिविधियों का जवाब है। हूतियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इज़रायली ठिकानों को निशाना बनाते रहेंगे।
- दक्षिणी इज़रायल के संवेदनशील सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया।
- बेर्शेबा और उसके आसपास के इलाकों में हमले का दावा किया गया।
- हमले का उद्देश्य प्रतिरोध मोर्चों पर हो रही आक्रामकता को रोकना बताया गया।
- ईरान और हिजबुल्लाह के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह हमला हुआ है।
इज़रायल की प्रतिक्रिया और क्षेत्र की वर्तमान स्थिति क्या है?
इज़रायल रक्षा बलों (IDF) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने यमन से दागी गई एक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है। इस प्रक्षेपण के कारण दक्षिणी इज़रायल के कई इलाकों में हवाई रक्षा सायरन बजने लगे, जिससे हजारों लोगों को सुरक्षा के लिए आश्रयों में जाना पड़ा। हालांकि, इज़रायल की ओर से फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| हमले की तारीख | 28 मार्च 2026 |
| प्रमुख लक्ष्य | बेर्शेबा और दक्षिणी सैन्य ठिकाने |
| हथियार का प्रकार | बैलिस्टिक मिसाइल |
| रक्षात्मक कार्रवाई | IDF द्वारा मिसाइल इंटरसेप्ट की गई |
| क्षेत्रीय प्रभाव | लाल सागर और बाब अल मंदेब में जलमार्ग पर खतरा |




